नागौर में गोदाम से 800 स्कूली बैग चोरी, नशे के लिए 3 दोस्तों ने बनाया प्लान; 180 रुपए का बैग 90 में बेचते थे
राजस्थान के नागौर जिले में चोरी का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां नशे की लत पूरी करने के लिए तीन दोस्तों ने एक गोदाम को ही अपना निशाना बना लिया। आरोपियों ने करीब 15 दिनों तक लगातार गोदाम में चोरी की वारदातों को अंजाम दिया और धीरे-धीरे 800 स्कूली बैग चोरी कर लिए। चोरी किए गए बैग को आरोपी बाजार में बेहद कम कीमत पर बेचते थे। 180 रुपए कीमत वाला स्कूली बैग महज 90 रुपए में बेचकर वे आसानी से पैसे जुटा लेते थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए तीनों आरोपियों को पकड़ लिया है।
जानकारी के अनुसार, नागौर में एक गोदाम में बड़ी संख्या में स्कूली बैग रखे हुए थे। तीन दोस्तों को इस गोदाम के बारे में जानकारी थी। उन्होंने नशे की जरूरत पूरी करने के लिए यहां से बैग चोरी करने की योजना बनाई। इसके बाद आरोपियों ने एक-दो दिन नहीं, बल्कि लगातार करीब 15 दिनों तक चोरी की वारदातों को अंजाम दिया। इस दौरान वे गोदाम से धीरे-धीरे बैग निकालते रहे, ताकि किसी को एक साथ बड़ी चोरी होने का शक न हो।
15 दिनों तक गोदाम को बनाया निशाना
आरोपियों ने गोदाम में रखे स्कूली बैग को चोरी करने का सिलसिला शुरू किया। करीब 15 दिनों तक वे अलग-अलग समय पर गोदाम से बैग पार करते रहे। इस तरह कुल 800 बैग चोरी कर लिए गए। इतनी बड़ी संख्या में बैग गायब होने के बाद गोदाम संचालक को नुकसान का पता चला।
इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। शिकायत मिलने पर पुलिस ने चोरी की घटना की जांच शुरू की और आरोपियों तक पहुंचने के लिए जानकारी जुटाई।
180 रुपए का बैग 90 रुपए में बेचते थे
चोरी किए गए स्कूली बैग को बेचने के लिए आरोपियों ने सस्ते दामों का सहारा लिया। बाजार में जिस बैग की कीमत करीब 180 रुपए थी, उसे आरोपी महज 90 रुपए में बेच देते थे। कम कीमत होने के कारण बैग आसानी से बिक जाते थे। इससे आरोपियों को जल्दी पैसे मिल जाते थे, जिनका इस्तेमाल वे अपनी नशे की लत पूरी करने में करते थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने चोरी के बैग बेचने के लिए कम कीमत रखने की रणनीति अपनाई थी। इस तरह उन्होंने कम समय में बड़ी संख्या में बैग बेच दिए।
तीनों दोस्त मिलकर करते थे वारदात
इस मामले में तीनों आरोपी दोस्त बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, वे मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। गोदाम से बैग निकालने से लेकर उन्हें बेचने तक की प्रक्रिया में तीनों की भूमिका थी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए 800 बैग में से कितने बैग बेचे जा चुके हैं और कितने बरामद किए जा सकते हैं। इसके अलावा चोरी के माल को खरीदने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
नशे की लत के लिए अपराध का रास्ता
नागौर की यह घटना एक बार फिर नशे की लत और उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधियों की ओर ध्यान खींचती है। अपनी लत पूरी करने के लिए तीन दोस्तों ने लगातार 15 दिनों तक चोरी की वारदातों को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और चोरी किए गए बैग की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।
