कोटा भामाशाह मंडी की बैठक में हंगामा, किसान संघ अध्यक्ष के आरोपों के बीच वॉकआउट
राजस्थान के कोटा स्थित भामाशाह मंडी में आयोजित बैठक उस समय विवादों में आ गई जब किसान नेताओं और मंडी प्रशासन के बीच तीखी बहस हो गई। बैठक के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि किसान संघ के प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए वॉकआउट कर दिया।
जानकारी के अनुसार, बैठक में मंडी की व्यवस्थाओं, किसानों की समस्याओं और खरीद प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी। इसी दौरान किसान संघ के अध्यक्ष ने मंडी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि किसानों को उचित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि मंडी में अव्यवस्था के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फसल की तौल, भुगतान में देरी और मंडी में मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। उनका यह भी कहना था कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बैठक के दौरान जब इन मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, तो किसान संघ के प्रतिनिधि नाराज होकर बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। इस घटनाक्रम के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। भामाशाह मंडी, जो एशिया की प्रमुख कृषि मंडियों में से एक मानी जाती है, वहां इस तरह का विवाद सामने आना किसानों और व्यापारियों के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
मंडी प्रशासन की ओर से कहा गया कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और उन्हें दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि व्यवस्थाओं में सुधार के लिए योजनाएं बनाई गई हैं और जल्द ही स्थिति बेहतर होगी।
दूसरी ओर किसान नेताओं का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखेगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस घटना के बाद साफ है कि मंडी में किसानों और प्रशासन के बीच संवाद की कमी बनी हुई है, जिसे दूर करना बेहद जरूरी है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में इस विवाद का समाधान कैसे निकाला जाता है।
