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निकाय चुनाव में कांग्रेस का नया प्लान, बूथ स्तर पर बैठक से चुने जाएंगे प्रत्याशी; हर वार्ड से 3 नामों का पैनल

 
निकाय चुनाव में कांग्रेस का नया प्लान, बूथ स्तर पर बैठक से चुने जाएंगे प्रत्याशी; हर वार्ड से 3 नामों का पैनल

राजस्थान में आगामी निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी अब वार्ड स्तर पर उम्मीदवारों के चयन के लिए स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं की राय को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। इसके तहत बूथ स्तर पर बैठकें आयोजित कर संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की जाएगी। प्रत्येक वार्ड से तीन नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजा जाएगा। इसके बाद पार्टी की ओर से सर्वे और अन्य समीकरणों के आधार पर अंतिम प्रत्याशी का चयन किया जाएगा।

बूथ स्तर पर जुटाई जाएगी जानकारी

कांग्रेस की नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य ऐसे उम्मीदवारों का चयन करना है, जिनकी अपने वार्ड में मजबूत पकड़ हो और जो स्थानीय मतदाताओं के बीच सक्रिय रहे हों। इसके लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से राय ली जाएगी। बैठक में संभावित दावेदारों की राजनीतिक सक्रियता, संगठन के प्रति उनकी भूमिका और क्षेत्र में जनसंपर्क जैसे पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

पार्टी का मानना है कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में शामिल करने से जमीनी स्तर पर सही उम्मीदवार की पहचान करने में मदद मिलेगी। साथ ही टिकट वितरण के बाद होने वाली नाराजगी को भी कम किया जा सकेगा।

हर वार्ड से तीन नामों का पैनल

प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में प्रत्येक वार्ड से तीन संभावित उम्मीदवारों के नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। संबंधित ब्लॉक और शहर संगठन के पदाधिकारी इन नामों को आगे भेजेंगे। इसके बाद पार्टी स्तर पर इन नामों की समीक्षा की जाएगी।

तीन नामों के पैनल में ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है, जिनका संगठन में सक्रिय योगदान रहा हो और जिनकी क्षेत्र में अच्छी छवि हो। इसके अलावा चुनाव जीतने की क्षमता को भी महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा।

सर्वे के बाद होगा अंतिम फैसला

वार्ड स्तर से तीन नाम सामने आने के बाद कांग्रेस की ओर से सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में संभावित उम्मीदवार की लोकप्रियता, स्थानीय समीकरण, सामाजिक प्रभाव और जीत की संभावना जैसे पहलुओं को देखा जाएगा। सर्वे के परिणाम और संगठन से मिली रिपोर्ट के आधार पर अंतिम प्रत्याशी का नाम तय किया जाएगा।

इस प्रक्रिया से पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि केवल बड़े नेताओं की सिफारिश के आधार पर टिकट न दिया जाए, बल्कि जमीनी स्थिति को भी निर्णय में शामिल किया जाए। इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

टिकट के दावेदारों में बढ़ेगी हलचल

निकाय चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही टिकट के दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। कई वार्डों में एक से अधिक नेता टिकट की दावेदारी कर सकते हैं। ऐसे में तीन नामों का पैनल तैयार करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। यदि किसी दावेदार का नाम पैनल में शामिल नहीं होता है तो उसके समर्थकों में नाराजगी पैदा हो सकती है। वहीं, अंतिम चयन के बाद टिकट से वंचित नेताओं को पार्टी के पक्ष में सक्रिय रखना भी संगठन के लिए अहम होगा।

जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम

कांग्रेस की इस रणनीति में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी। स्थानीय कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में मतदाताओं की पसंद और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति से बेहतर तरीके से परिचित होते हैं। ऐसे में उनकी राय पार्टी को उम्मीदवार चयन में मदद कर सकती है।

निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस का यह प्रयोग कितना प्रभावी साबित होता है, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल वार्डवार पैनल, सर्वे और संगठनात्मक रिपोर्ट के आधार पर टिकट तय करने की रणनीति से पार्टी ने संकेत दिया है कि इस बार प्रत्याशी चयन में जमीनी फीडबैक को प्राथमिकता दी जाएगी।