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सूचना आयोग ने जिला रसद अधिकारी पर लगाया 5 हजार रुपए जुर्माना: RTI का 7 महीने देरी से दिया जवाब, दो राशन कार्ड किए थे डिलीट

 
सूचना आयोग ने जिला रसद अधिकारी पर लगाया 5 हजार रुपए जुर्माना: RTI का 7 महीने देरी से दिया जवाब, दो राशन कार्ड किए थे डिलीट

राजस्थान में सूचना के अधिकार यानी RTI कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने में देरी के मामले में सूचना आयोग ने जिला रसद अधिकारी पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग के सामने मामला तब पहुंचा, जब आवेदक को निर्धारित समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।

RTI का जवाब देने में हुई 7 महीने की देरी

मामले के अनुसार, आवेदक ने जिला रसद कार्यालय से राशन कार्ड से संबंधित जानकारी RTI के माध्यम से मांगी थी। नियमानुसार तय समय में सूचना उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन विभाग की ओर से जवाब देने में करीब 7 महीने की देरी हुई।

आवेदक ने सूचना नहीं मिलने पर मामले को आगे सूचना आयोग के समक्ष उठाया। सुनवाई के दौरान सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी का मामला सामने आया।

दो राशन कार्ड किए गए थे डिलीट

मामला दो राशन कार्डों से भी जुड़ा था। आरोप के मुताबिक संबंधित राशन कार्डों को रिकॉर्ड से डिलीट कर दिया गया था। RTI के जरिए आवेदक ने इसी संबंध में जानकारी और रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

सुनवाई के दौरान आयोग ने सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा।

अधिकारी पर 5 हजार रुपए की पेनल्टी

सूचना आयोग ने मामले में जिला रसद अधिकारी पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया। आयोग ने स्पष्ट किया कि RTI के तहत मांगी गई सूचना निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराना लोक सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी है। बिना उचित कारण सूचना देने में देरी होने पर RTI एक्ट के तहत दंड का प्रावधान है।

RTI आवेदकों के अधिकारों पर जोर

इस मामले के बाद एक बार फिर सूचना के अधिकार के तहत समय पर जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा शुरू हुई है। RTI कानून का उद्देश्य सरकारी विभागों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे मामलों में सूचना आयोग संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर सकता है।