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निजी फर्म संभालेगी शहर की सफाई व्यवस्था, दो साल में 7.50 करोड़ रुपए होंगे खर्च

 
निजी फर्म संभालेगी शहर की सफाई व्यवस्था, दो साल में 7.50 करोड़ रुपए होंगे खर्च

शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर निकाय ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब शहर की सफाई व्यवस्था निजी फर्म को सौंपी जाएगी। इस कार्य के लिए आगामी दो वर्षों में करीब 7.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नगर परिषद/नगर निगम की ओर से इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिसके बाद जल्द ही नई व्यवस्था लागू की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, शहर में बढ़ती आबादी और कचरे की मात्रा को देखते हुए मौजूदा सफाई व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो रही थी। नियमित सफाई, कचरा उठान और संसाधनों की कमी के कारण लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए निजी फर्म की सेवाएं लेने का निर्णय लिया गया है।

निजी फर्म शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सड़क सफाई, नालियों की सफाई और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण का काम संभालेगी। इसके लिए आधुनिक मशीनें, वाहन और प्रशिक्षित स्टाफ तैनात किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे सफाई कार्य में तेजी आएगी और शहर को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी।

नगर निकाय का दावा है कि नई व्यवस्था के तहत नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। सफाई कार्य की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सुपरविजन टीम बनाई जाएगी, ताकि काम में लापरवाही या गड़बड़ी की स्थिति न बने। साथ ही नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन या शिकायत प्रणाली भी शुरू की जा सकती है।

हालांकि, इस फैसले को लेकर शहर में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, क्योंकि इससे सफाई व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। वहीं, कुछ लोगों ने खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं और पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की है।

नगर निकाय अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छता शहर की प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। यदि निजी फर्म बेहतर प्रदर्शन करती है, तो भविष्य में भी इस मॉडल को जारी रखा जा सकता है।