कोटा PWD क्वालिटी कंट्रोल खंड में 15 लाख के गबन का नया खुलासा, फर्जी चालान और GRN नंबर का मामला
सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की क्वालिटी कंट्रोल खंड (विंग) में 15 लाख रुपये के गबन के मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि कई ठेकेदारों को मैटेरियल टेस्टिंग के लिए जारी ऑनलाइन चालानों की असली रसीद नहीं दी गई, बल्कि फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, ठेकेदारों को ATO विजय सक्सेना के सील और साइन वाली जॉब मिक्स लेटर (जो कि मटेरियल जांच के लिए XEN द्वारा भेजा गया था) की अटेस्टेड फोटो कॉपी दी गई। इस अटेस्टेड फोटो कॉपी पर फर्जी सरकारी रसीद नंबर (GRN नंबर) और मैटेरियल टेस्टिंग का अमाउंट दर्ज किया गया, जिससे विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच वित्तीय गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गड़बड़ी में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत सामने आती है। फर्जी चालान और GRN नंबर का इस्तेमाल करके संसाधनों की हेराफेरी और 15 लाख रुपये के गबन की संभावना बनी।
PWD के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। विभाग ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक साक्ष्यों को सीलबंद कर सत्ताधिकारियों के पास रिपोर्ट भेजी जा रही है।
कोटा प्रशासन के अनुसार, इस तरह की गड़बड़ी न केवल सरकारी धन की हानि करती है, बल्कि विभाग की छवि को भी प्रभावित करती है। इसलिए अब विभागीय और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की धांधली रोकी जा सके।
स्थानीय ठेकेदार और कर्मचारी इस मामले पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें किसी भी समय असली चालान नहीं दिया गया, जिससे काम के भुगतान और टेस्टिंग में गंभीर समस्याएं हुई हैं।
यह मामला PWD में पारदर्शिता और वित्तीय नियंत्रण की कमी को भी उजागर करता है और प्रशासन पर दबाव बढ़ा रहा है कि वह संयुक्त जांच और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे।
