कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने की तैयारी, नए विधेयक में 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान
राजस्थान विधानसभा में कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनिमय विधेयक 2025 पारित हो गया है। सदन में इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। हालाँकि, इस विधेयक पर सदन में लंबी चर्चा हुई है। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि यह केवल कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने बताया कि यह विधेयक पहले जनता की राय के लिए भेजा गया था और आज सदन में 11 सदस्यों ने अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अब बिना पंजीकरण के कोई भी कोचिंग सेंटर संचालित नहीं होगा। इसके साथ ही, कोचिंग संस्थानों में न्यूनतम 100 छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। बैरवा ने कहा कि इस विधेयक से बड़े कोचिंग हब को संगठित करने में मदद मिलेगी। विधेयक में प्रावधान है कि नियमों का उल्लंघन करने पर दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। विधेयक में क्या हैं मुख्य प्रावधान
बिना पंजीकरण के कोई भी कोचिंग सेंटर संचालित नहीं होगा। कोचिंग सेंटर में न्यूनतम 100 छात्र अनिवार्य हैं। नियम तोड़ने पर दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान। कोचिंग संस्थानों के संचालन के लिए कोचिंग नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जिसके पास निगरानी के अधिकार होंगे। छात्रों के लिए शिकायत वेब पोर्टल और हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। कोचिंग में तनाव प्रबंधन सत्र अनिवार्य होंगे।
बैरवा ने कहा कि इस विधेयक से बड़े कोचिंग हब को संगठित करने में मदद मिलेगी। विधेयक में प्रावधान है कि नियमों का उल्लंघन करने पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कोचिंग संस्थानों के संचालन और निगरानी के लिए कोचिंग नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति होगी, जिसके पास व्यापक अधिकार होंगे।
उन्होंने कहा कि छात्रों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए तनाव प्रबंधन सत्र आयोजित किए जाएंगे। एक वेब पोर्टल और छात्र हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जहाँ छात्र अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और सहायता प्राप्त कर सकेंगे। बैरवा ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक केवल कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य और शैक्षणिक माहौल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह विधेयक लचीला है और आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में इसमें संशोधन किए जा सकते हैं।
