कोटा नगर निगम चुनाव: परिणाम से पहले भाजपा-कांग्रेस ने शुरू की प्रत्याशियों की निगरानी, बाड़ेबंदी की तैयारी
नगर निगम चुनाव में मतदान खत्म होने के साथ ही अब शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई है। ईवीएम में प्रत्याशियों की किस्मत बंद होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने उम्मीदवारों को संभालने में जुट गए हैं। बोर्ड गठन को लेकर किसी भी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचने के लिए दोनों पार्टियां प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं।सूत्रों के अनुसार, चुनाव परिणाम आने तक प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी किए जाने की चर्चा है। हालांकि अभी तक दोनों प्रमुख दलों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संगठन स्तर पर तैयारियां शुरू होने की बात सामने आ रही है।
बहुमत के गणित पर नजर
कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। बोर्ड बनाने के लिए जरूरी बहुमत हासिल करना दोनों दलों का मुख्य लक्ष्य है। ऐसे में परिणाम से पहले ही पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद शुरू हो गई है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो सकती है। ऐसी स्थिति में एक-एक पार्षद का समर्थन बोर्ड गठन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
क्रॉस वोटिंग का सता रहा डर
नगर निकाय चुनावों में अक्सर परिणाम के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपने पार्षदों के दूसरे खेमे में जाने या क्रॉस वोटिंग की आशंका बनी रहती है।इसी वजह से पार्टियां अपने विजयी प्रत्याशियों को एक साथ रखने की रणनीति बनाती हैं, ताकि महापौर और बोर्ड गठन के समय संख्या बल मजबूत बना रहे।
निर्दलीय निभा सकते हैं अहम भूमिका
कोटा नगर निगम चुनाव में कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले को प्रभावित किया है। अगर भाजपा और कांग्रेस में से किसी को बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी बन सकते हैं।अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं। परिणाम आने के बाद ही साफ होगा कि कोटा नगर निगम की सत्ता किस दल के हाथों में जाएगी और बोर्ड गठन का समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
