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कोटा नगर निगम चुनाव: 121 नामांकन खारिज, भाजपा-कांग्रेस के बागी दावेदारों को झटका; 473 प्रत्याशी मैदान में

 
कोटा नगर निगम चुनाव: 121 नामांकन खारिज, भाजपा-कांग्रेस के बागी दावेदारों को झटका; 473 प्रत्याशी मैदान में

कोटा नगर निगम चुनाव को लेकर नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया पूरी हो गई है। स्क्रूटनी के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। निर्वाचन विभाग की जांच में कुल 548 प्रत्याशियों की ओर से दाखिल किए गए 600 नामांकन पत्रों में से 473 प्रत्याशियों के 479 नामांकन पत्र सही पाए गए हैं, जबकि 121 नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए हैं।

नामांकन पत्रों की जांच के बाद कई वार्डों में चुनावी समीकरण बदल गए हैं। सबसे बड़ा झटका उन दावेदारों को लगा है, जिन्होंने राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने बागी उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। अब नामांकन खारिज होने के बाद कई संभावित बागी उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर हो गए हैं।

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जारी जानकारी के अनुसार, स्क्रूटनी प्रक्रिया में भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों के उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की भी जांच की गई। जिन प्रत्याशियों के दस्तावेजों में कमी, नियमों के अनुरूप जानकारी नहीं होने या अन्य तकनीकी खामियां मिलीं, उनके नामांकन निरस्त कर दिए गए।

कोटा नगर निगम चुनाव में इस बार बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में असंतोष भी देखने को मिला था और कुछ नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल किया था। ऐसे में नामांकन जांच के बाद अब राजनीतिक दलों ने राहत की सांस ली है।

अब उम्मीदवारों के पास नाम वापसी का अवसर रहेगा। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव मैदान में रहने वाले प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। इसके बाद चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे और प्रचार अभियान पूरी तरह तेज हो जाएगा।

कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले को रोचक बना सकते हैं। नामांकन खारिज होने और नाम वापसी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला होगा और कहां सीधी टक्कर देखने को मिलेगी।

फिलहाल राजनीतिक दल अपने अधिकृत प्रत्याशियों के समर्थन में रणनीति बनाने में जुट गए हैं। वहीं, जिन दावेदारों के नामांकन खारिज हुए हैं, वे अब चुनावी समीकरण से बाहर हो गए हैं। आने वाले दिनों में कोटा नगर निगम चुनाव का प्रचार और ज्यादा तेज होने की संभावना है।