Kota माइग्रेन, सिरदर्द से बेहाल हैं आजकल मासूम, परिजन हो रहे परेशान

विशेषज्ञों का कहना है कि आधे या पूरे सिर में दर्द से ही माइग्रेन का अंदेशा नहीं लगाया जा सकता है, बल्कि बार-बार उल्टी होना, दृष्टि बाधित होना, पेट में दर्द, जी मिचलाना भी इसके कारण है। ज्यादातर बच्चों में यह समस्या वंशानुगत भी होती है। सर्दी में माइग्रेन के केस ज्यादा बढ जाते हैं, क्योंकि ठंड से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं।
चिकित्सकों ने बताया कि रेडी टू इट, फास्ट व जंक फूड, रेडिमेड मसाले बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहे हैं। इनमें चिली पैपर, दालचीनी, चीज, टमाटर-आलू या इनसे बने पैक्ड प्रोडक्ट आदि शामिल हैं। इनके सेवन के तुरंत बाद बच्चे असहज या सिर में दर्द महसूस करते हैं, तो परिजन इसका ध्यान रखें और बच्चों को ऐसे खाने से दूर रखें। पर्याप्त नींद, मोबाइल से दूरी, खानपान में सुधार के साथ बच्चों को तेज धूप और तेज रोशनी से बचाएं। बच्चों को हेडफोन, ईयर बड्स ज्यादा देर न लगाने दें। ओ पीडी में रोजाना 10 से 15 बच्चे माइग्रेन से पीड़ित आ रहे हैं। नियमित इलाज लेने पर तीन से छह महीने में ठीक हो जाते हैं। इसमें दवा से ही इलाज संभव है। ध्यान रहे बच्चों को खाली पेट स्कूल या घर से बाहर नहीं भेजें। तेज धूप में नहीं निकले। तेज शोर से दूर रहे। पर्याप्त नींद लें।