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कोटा निकाय चुनाव: 22 वार्डों में आमने-सामने की टक्कर, 23 वार्डों में 3 से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशी

 
कोटा निकाय चुनाव: 22 वार्डों में आमने-सामने की टक्कर, 23 वार्डों में 3 से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशी

नगर निकाय चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद अब चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। कोटा में कई वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा, जबकि कुछ वार्ड ऐसे हैं जहां निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है।

चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, कोटा के 22 वार्डों में आमने-सामने की टक्कर है। वहीं 23 वार्डों में तीन से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में इन वार्डों में किसी एक पार्टी के पक्ष में वोटों का समीकरण बनना आसान नहीं होगा।

22 वार्डों में सीधा मुकाबला

कोटा के 22 वार्ड ऐसे हैं जहां मुख्य रूप से दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। इन वार्डों में चुनावी लड़ाई सीधे तौर पर आमने-सामने की नजर आ रही है।

ऐसे मुकाबलों में प्रत्याशियों के व्यक्तिगत संपर्क, पार्टी संगठन और स्थानीय मुद्दे काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में मतदाताओं को साधने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।

23 वार्डों में निर्दलीयों ने बढ़ाई चुनौती

दूसरी ओर, 23 वार्डों में तीन से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों की इतनी बड़ी संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

कई बार निर्दलीय प्रत्याशी किसी खास क्षेत्र या समुदाय में अपनी व्यक्तिगत पकड़ के कारण प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के वोट काट सकते हैं। ऐसे में बहुकोणीय मुकाबले में जीत का अंतर भी कम हो सकता है।

RLP, AAP और CPI(M) भी मैदान में

कोटा निकाय चुनाव में मुकाबला सिर्फ बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीयों तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP), आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं।

इन दलों की मौजूदगी से कुछ वार्डों में मुकाबला और रोचक हो गया है। हालांकि इन पार्टियों के उम्मीदवार कितने प्रभावी साबित होते हैं, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।

बागियों पर भी रहेगी नजर

प्रमुख राजनीतिक दलों के टिकट वितरण के बाद कई जगह नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल किया। ऐसे बागी उम्मीदवार अपने पुराने जनसंपर्क और स्थानीय पहचान के दम पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को चुनौती दे सकते हैं।

बीजेपी और कांग्रेस के लिए ऐसे प्रत्याशी खास तौर पर चिंता का कारण बन सकते हैं, क्योंकि मुकाबले में वोटों का थोड़ा सा बिखराव भी नतीजे बदल सकता है।

स्थानीय मुद्दे होंगे निर्णायक

कोटा के वार्डों में सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और विकास कार्य जैसे स्थानीय मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। प्रत्याशी घर-घर संपर्क कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेंगे।

अब जब चुनावी मैदान की तस्वीर स्पष्ट हो चुकी है, तो 22 वार्डों की सीधी लड़ाई और 23 वार्डों में निर्दलीयों की चुनौती पर सभी की नजर रहेगी।

कोटा में इस बार मुकाबला सिर्फ दो प्रमुख दलों के बीच नहीं है। निर्दलीयों के साथ RLP, AAP और CPI(M) की मौजूदगी ने कई वार्डों में चुनावी गणित को दिलचस्प बना दिया है। अब जनता का फैसला ही बताएगा कि किसका संगठन, किसकी रणनीति और किस उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ सबसे मजबूत साबित होती है।