Aapka Rajasthan

निगम चुनाव खर्च के ब्यौरे में रोचक आंकड़े, ई-रिक्शा का किराया 1600 तो लग्जरी कार का सिर्फ 1000 रुपये

 
निगम चुनाव खर्च के ब्यौरे में रोचक आंकड़े, ई-रिक्शा का किराया 1600 तो लग्जरी कार का सिर्फ 1000 रुपये

निगम चुनाव के दौरान प्रत्याशियों की ओर से जमा कराए गए चुनावी खर्च के ब्यौरे में कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। खर्च का हिसाब देखकर कई मामलों में सामान्य तौर पर लगने वाली कीमतों और प्रत्याशियों की ओर से दर्ज की गई राशि के बीच अंतर नजर आया। सबसे ज्यादा चर्चा ई-रिक्शा और लग्जरी कारों के किराए को लेकर है। कुछ प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किए गए ई-रिक्शा का किराया 1600 रुपये तक बताया, जबकि लग्जरी कारों के लिए महज 1000 रुपये का खर्च दर्शाया गया।

चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को प्रचार, वाहन, पोस्टर, बैनर, बैठकों और अन्य गतिविधियों पर हुए खर्च का विवरण निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत करना होता है। इसी खर्च के ब्यौरे की जांच के दौरान अलग-अलग मदों में दर्ज रकम सामने आई। वाहन किराए के आंकड़ों ने खास तौर पर ध्यान खींचा है।

दिए गए खर्च विवरण के मुताबिक कुछ प्रत्याशियों ने प्रचार के लिए ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया और इसके लिए 1600 रुपये का किराया दर्ज किया। दूसरी ओर, लग्जरी कार जैसी महंगी गाड़ियों के किराए के लिए कुछ मामलों में सिर्फ 1000 रुपये खर्च दिखाया गया। इस अंतर को लेकर चुनाव खर्च के आंकड़ों पर चर्चा शुरू हो गई है।

चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचने के लिए वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें ऑटो, ई-रिक्शा, कार, जीप और अन्य वाहन शामिल होते हैं। वाहन के प्रकार, इस्तेमाल की अवधि और प्रचार क्षेत्र के आधार पर वास्तविक खर्च अलग-अलग हो सकता है। ऐसे में प्रत्याशियों द्वारा दर्ज किए गए खर्च का सत्यापन चुनाव अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

चुनाव खर्च का पूरा रिकॉर्ड इसलिए भी अहम होता है क्योंकि प्रत्याशियों को निर्धारित नियमों के अनुसार अपने चुनावी खर्च का हिसाब देना होता है। इसमें प्रचार सामग्री से लेकर वाहन, बैठक, लाउडस्पीकर और अन्य खर्च शामिल हो सकते हैं। संबंधित अधिकारियों की ओर से जमा किए गए ब्यौरे की जांच की जाती है और नियमों के अनुरूप खर्च दर्ज हुआ है या नहीं, इसे देखा जाता है।

ई-रिक्शा और लग्जरी कार के किराए में सामने आया यह अंतर चुनावी खर्च के रिकॉर्ड को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, किसी भी खर्च को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

निगम चुनाव के खर्च के ये आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों का हिसाब किस तरह दर्ज किया जाता है। अब निगाह इस बात पर है कि चुनाव अधिकारियों की जांच में इन खर्चों को लेकर क्या स्थिति सामने आती है और प्रत्याशियों के प्रस्तुत किए गए ब्यौरे को किस तरह सत्यापित किया जाता है।