कोटा नगर निगम चुनाव में Gen-Z की एंट्री, 21 से 29 साल के युवा आजमा रहे किस्मत; निर्दलीयों की संख्या सबसे ज्यादा
राजनीति में अब अनुभव के साथ युवाओं की ऊर्जा और नई सोच को भी महत्व मिलने लगा है। इसका असर इस बार कोटा नगर निगम चुनाव में साफ नजर आ रहा है। शहर की सरकार बनाने के लिए बड़ी संख्या में युवा उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं। खास बात यह है कि इनमें 21 से 29 वर्ष की उम्र के Gen-Z युवा भी शामिल हैं, जो पहली बार स्थानीय राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
कोटा नगर निगम चुनाव में इस बार युवाओं की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। एक ओर जहां अनुभवी नेता और पुराने राजनीतिक कार्यकर्ता मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर युवा उम्मीदवार अपने नए विचारों और अलग चुनावी एजेंडे के साथ मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं।
21 से 29 साल के युवाओं की मौजूदगी
इस चुनाव में 21 से 29 वर्ष की उम्र के कई उम्मीदवार मैदान में हैं। ये युवा सड़क, सफाई, शिक्षा, रोजगार, खेल सुविधाओं, डिजिटल सेवाओं और शहर के विकास जैसे मुद्दों को लेकर अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं।
युवाओं का चुनाव लड़ना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नगर निगम सीधे तौर पर शहर के रोजमर्रा के मुद्दों से जुड़ा होता है। ऐसे में नई पीढ़ी के उम्मीदवार स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए आधुनिक सोच और नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दे सकते हैं।
निर्दलीयों में युवाओं की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी
कोटा नगर निगम चुनाव में एक दिलचस्प तस्वीर यह भी सामने आई है कि कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की तुलना में निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में चुनाव लड़ने वाले युवाओं की संख्या अधिक है। कई युवा किसी राजनीतिक दल का टिकट नहीं मिलने या अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने के उद्देश्य से निर्दलीय मैदान में उतरे हैं।
वहीं, भाजपा और कांग्रेस भी युवा चेहरों को मौका देकर नई पीढ़ी को संगठन और स्थानीय राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। हालिया नामांकन प्रक्रिया में दोनों प्रमुख दलों के बड़ी संख्या में उम्मीदवार सामने आए हैं।
सोशल मीडिया बना प्रचार का बड़ा माध्यम
युवा उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार का तरीका भी पारंपरिक नेताओं से अलग दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप और डिजिटल कैंपेन के जरिए वे मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। छोटी-छोटी वीडियो क्लिप और स्थानीय मुद्दों पर पोस्ट के जरिए उम्मीदवार अपनी बात रख रहे हैं।
कोटा नगर निगम चुनाव में इस बार करीब 8.24 लाख मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। इनमें महिला मतदाताओं की संख्या भी काफी बड़ी है।
क्या Gen-Z बदलेगा चुनावी समीकरण?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या युवाओं की यह मजबूत मौजूदगी चुनावी नतीजों में भी दिखाई देगी। युवा उम्मीदवारों के सामने जहां अनुभव की कमी चुनौती हो सकती है, वहीं उनका नया दृष्टिकोण, ऊर्जा और मतदाताओं के साथ सीधा संवाद उनकी ताकत बन सकता है।
कोटा में 11 सितंबर को मतदान होना है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में इन युवा उम्मीदवारों का प्रचार अभियान और तेज होगा। अब देखना होगा कि मतदाता अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताते हैं या नई पीढ़ी के इन उम्मीदवारों को शहर की सरकार में जिम्मेदारी सौंपते हैं।
