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कोटा में RTE एडमिशन पर संकट, हजारों बच्चों का भविष्य अधर में; जुलाई बीतने के बाद भी स्कूलों के चक्कर लगा रहे अभिभावक

 
कोटा में RTE एडमिशन पर संकट, हजारों बच्चों का भविष्य अधर में; जुलाई बीतने के बाद भी स्कूलों के चक्कर लगा रहे अभिभावक

राजस्थान के कोटा जिले में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत चयनित बच्चों के प्रवेश को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा विभाग की लापरवाही और निजी स्कूलों की कथित मनमानी के चलते हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है। जुलाई का आधा महीना बीत जाने के बाद भी कई चयनित बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पाया है।

RTE के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। इस योजना के तहत कोटा जिले में भी बड़ी संख्या में बच्चों का चयन हुआ था। लेकिन प्रवेश प्रक्रिया में देरी और स्कूलों की उदासीनता के कारण कई बच्चे अब तक कक्षाओं से दूर हैं।

अभिभावकों का आरोप है कि वे अपने बच्चों के प्रवेश के लिए लगातार स्कूलों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। कई निजी स्कूलों पर आरोप है कि वे RTE के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं।

अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। समय पर स्कूल नहीं जाने से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है और उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित हो सकता है।

वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से निजी स्कूलों को RTE नियमों के तहत प्रवेश देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि यदि कोई स्कूल नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

RTE प्रवेश प्रक्रिया में देरी को लेकर अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में भी नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि सरकार की महत्वपूर्ण योजना का लाभ बच्चों तक समय पर पहुंचना चाहिए, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण जरूरतमंद परिवार परेशान हो रहे हैं।

शिक्षाविदों का मानना है कि शुरुआती महीनों में स्कूल न पहुंच पाने से बच्चों की पढ़ाई की नींव कमजोर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन को जल्द से जल्द लंबित प्रवेश प्रक्रिया पूरी करानी चाहिए, ताकि बच्चों का शैक्षणिक नुकसान रोका जा सके।

फिलहाल कोटा में RTE प्रवेश को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अभिभावक जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग ने मामले की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। अब देखना होगा कि चयनित बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए प्रशासन कितनी जल्दी प्रभावी कार्रवाई करता है।