कोटा के 29 वार्डों में कांटे की टक्कर: निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं समीकरण, हाइब्रिड नियम से भी बन सकता है मेयर
कोटा नगर निगम चुनाव में मुकाबला अब बेहद रोचक हो गया है। शहर के करीब 29 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है, जबकि कई सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी दोनों प्रमुख दलों के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
इस बार चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। कई वार्डों में टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा और कांग्रेस के बागी नेता भी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
निर्दलीयों के हाथ में हो सकती है मेयर की चाबी
कोटा नगर निगम चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर भाजपा और कांग्रेस में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षद मेयर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।कई निर्दलीय प्रत्याशी स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें सफाई व्यवस्था, सड़क, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और आवारा पशुओं की समस्या प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
29 वार्डों में सीधी टक्कर
शहर के कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस ने मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं। दोनों दलों के प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में जनसंपर्क कर वोटरों को साधने में जुटे रहे।जहां भाजपा विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं को मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और जनता से जुड़े मुद्दों के सहारे चुनाव मैदान में है।
हाइब्रिड नियम से बदल सकता है समीकरण
कोटा में मेयर पद को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज है। नए नियमों और आरक्षण व्यवस्था के चलते मेयर की कुर्सी के लिए मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। हाइब्रिड व्यवस्था के तहत मेयर चयन की प्रक्रिया में निर्वाचित पार्षदों के साथ अन्य राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।राजनीतिक दलों की नजर अब उन वार्डों पर है, जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहने की संभावना है। ऐसे में एक-एक सीट मेयर चुनाव के लिए अहम साबित हो सकती है।
युवा और स्थानीय मुद्दे निभाएंगे बड़ी भूमिका
कोटा नगर निगम चुनाव में इस बार युवा मतदाता और स्थानीय समस्याएं भी अहम फैक्टर हैं। शिक्षा नगरी के रूप में पहचान रखने वाले कोटा में रोजगार, विकास, सफाई और बेहतर सुविधाएं मतदाताओं के प्रमुख मुद्दे रहे हैं।अब मतदान के बाद ही साफ होगा कि कौन सा दल नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने की स्थिति में आता है। लेकिन इतना तय है कि इस बार कोटा में निर्दलीय प्रत्याशी और कड़े मुकाबले वाले वार्ड मेयर की कुर्सी का फैसला करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
