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कोटा ग्रामीण क्षेत्र में आवारा कुत्तों का कहर: 4 साल की बच्ची पर हमला, चेहरे पर गंभीर चोटें

 
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कोटा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को एक चौंकाने वाली घटना हुई, जब सिर्फ चार साल की बच्ची पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। बच्ची का चेहरा नोच लिया गया और उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और समय रहते उसे बचाया। यह घटना ग्रामीण लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता और आक्रोश दोनों पैदा कर रही है।

जानकारी के अनुसार, बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी, तभी अचानक एक झुंड आवारा कुत्तों का उस पर हमला हो गया। छोटे आकार की बच्ची की मदद करने की कोई ताकत नहीं थी, और कुत्तों ने उसके चेहरे पर गहरे घाव कर दिए। बच्ची के माता-पिता और पड़ोसी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उनकी समय पर मदद और तेजी से प्रतिक्रिया के कारण बड़ी दुर्घटना टल गई।

घटना के बाद बच्ची को तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के चेहरे पर नोक-चोंच और खरोंच के निशान हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से गंभीर खतरे से बच गई है। डॉक्टरों ने इसे तुरंत वेटिनरी और बायोलॉजिकल सहायता की आवश्यकता वाले मामले के रूप में देखा। बच्ची को टीका और संक्रमण से बचाव के लिए उपचार जारी रखा गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि हुई है। ये कुत्ते न केवल घरों के आसपास, बल्कि स्कूल और बाजार के रास्तों में भी घूमते नजर आते हैं। कई बार बच्चों और बुजुर्गों पर हमला होने की घटनाएं सामने आई हैं। लोग कह रहे हैं कि प्रशासन और नगर निगम की ओर से इस समस्या पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने बताया कि कुत्तों को नियंत्रित करने और उनके खिलाफ अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत आवारा कुत्तों की संख्या घटाने, उन्हें कैच करने और सुरक्षित प्रजनन केंद्रों में रखने की रणनीति पर काम चल रहा है। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि वे आवारा कुत्तों को परेशान न करें, लेकिन बच्चों और घरों के आसपास सतर्कता बरतें।

विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों के बढ़ते संकट से निपटने के लिए सामूहिक और सुनियोजित प्रयास की आवश्यकता है। इसके तहत कैच-एंड-रिलीज़, टीकाकरण और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों को भी बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर खेलने के लिए मार्गदर्शन देना जरूरी है।

बच्ची के माता-पिता ने घटना के बाद प्रशासन से सख्त कार्रवाई और आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने की मांग की है। उनके अनुसार, अगर समय पर मदद नहीं मिली होती तो यह हादसा और गंभीर हो सकता था।