कोटा शहर की सरकार में शामिल होने की कोशिश: 41 घरेलू महिलाएं चुनाव मैदान में, कांग्रेस से 25 तो बीजेपी से 16 हाउस वाइफ
कोटा नगर निगम चुनाव में इस बार बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी किस्मत आजमा रही हैं। खास बात यह है कि इनमें 41 घरेलू महिलाएं (हाउस वाइफ) भी शामिल हैं, जिन्होंने अब घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में कदम रखने का फैसला किया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों प्रमुख दलों ने ऐसी महिलाओं को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है।
इन महिलाओं का कहना है कि लंबे समय तक घर-परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब वे अपने वार्ड की समस्याओं को समझते हुए जनता की आवाज नगर निगम तक पहुंचाना चाहती हैं।
कांग्रेस से 25 और बीजेपी से 16 घरेलू महिलाएं मैदान में
कोटा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 25 घरेलू महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी की ओर से 16 हाउस वाइफ चुनाव लड़ रही हैं। ये महिलाएं अलग-अलग वार्डों से पार्षद बनने के लिए जनता के बीच पहुंच रही हैं।
इन प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे पहली बार चुनावी राजनीति में उतरकर मतदाताओं का भरोसा जीत सकें। हालांकि, उनका दावा है कि घरेलू जीवन के अनुभव ने उन्हें लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को करीब से समझने का मौका दिया है।
घर संभालने से लेकर वार्ड संभालने तक का सफर
चुनावी मैदान में उतरी कई महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से परिवार और समाज की जिम्मेदारियां निभाती आ रही हैं। इसी अनुभव के आधार पर अब वे शहर की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए काम करना चाहती हैं।
उनके प्रमुख मुद्दों में सफाई व्यवस्था, पेयजल, सड़क, नालियों की समस्या, स्ट्रीट लाइट, महिला सुरक्षा और बच्चों से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। आरक्षण व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आगे आई हैं। हालांकि, अब कई महिलाएं सामान्य सीटों पर भी चुनाव लड़कर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं।
राजनीतिक दल भी महिला मतदाताओं और महिला नेतृत्व को ध्यान में रखते हुए अधिक संख्या में महिला उम्मीदवारों को मौका दे रहे हैं।
मतदाताओं से मांग रहीं समर्थन
घरेलू महिला प्रत्याशी अब घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रही हैं। वे अपने अनुभव और स्थानीय मुद्दों को आधार बनाकर मतदाताओं से समर्थन मांग रही हैं।
कई महिला उम्मीदवारों का कहना है कि यदि उन्हें जनता का आशीर्वाद मिलता है तो वे केवल पार्षद की भूमिका तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगी।
कोटा नगर निगम चुनाव में इन 41 घरेलू महिलाओं की भागीदारी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब फैसला मतदाताओं के हाथ में है कि वे अनुभवी राजनीतिक चेहरों के साथ जाएंगे या नए महिला नेतृत्व को मौका देंगे।
