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Karoli अनदेखी के दंश से दर्दभरी हो रही परकोटे की दास्तां

 
Karoli अनदेखी के दंश से दर्दभरी हो रही परकोटे की दास्तां
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली रियासतकाल में सुरक्षा की दृष्टि से बेजोड़ रहा यहां का परकोटा साल दर साल अनदेखी के दंश से दरक रहा है। जर्जरहाल हो रहा परकोटे से अब सुरक्षा की बजाए खतरे की आशंका उत्पन्न होने लगी है। बावजूद इसके जिमेदार इसकी सार-संभाल और मरमत के प्रति गंभीर नहीं हैं।नतीजतन काफी प्राचीन हो चुके परकोटे की देखरेख और मरमत के अभाव में प्रतिवर्ष बारिश के दौरान गिरने की नौबत आती है। पिछले वर्षों में बारिश के दौरान कई जगह से परकोटे का काफी हिस्सा धराशायी होकर ढह चुका है। कई स्थानों पर अभी अन्य हिस्से के गिरने की आशंका से क्षेत्र के बाशिंदे भयभीत रहते हैं। हालांकि कुछ वर्ष पहले सरकार की ओर से परकोटे की मरमत पर राशि भी खर्च की गई, लेकिन उस दौरान कुछ हिस्से में ही कार्य हुआ। वर्तमान में परकोटा अनेक स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। जिसकी मरमत-जीर्णोद्धार की दरकार बनी हुई है।

जगह-जगह हालत खराब: वजीरपुर गेट से हिण्डौनगेट की ओर से जा रहे परकोटे के हिस्से में बीच-बीच में कई जगह पत्थर बाहर निकल आए हैं। इस क्षेत्र में कायस्थ खिड़किया के समीप से निकल रहा परकोटा क्षतिग्रस्त हैं। इसके कई हिस्सों में दरार आ चुकी है और दीवार की पट्टी भी टूट चुकी है। इससे परकोटे के पत्थर बाहर नजर आने लगे हैं। स्थिति यह है कि इस मार्ग से गुजरने वाले लोग भी अब डरने लगे हैं। इसी प्रकार यहां मासलपुर गेट के समीप का परकोटे का हिस्सा गत वर्षों में ढह चुका है। अब शेष हिस्सा खतरे का सबब बना हुआ है। मासलपुर गेट के समीप ही राजकीय विद्यालय भी संचालित है, जो क्षतिग्रस्त परकोटा से सटा है। शेष हिस्से के भी गिरने की आशंका बनी है। बैठा हनुमान मंदिर के समीप पिछले वर्ष भी बारिश से परकोटे का हिस्सा ढहा था, वो हिस्सा तो दुरुस्त नहीं हुआ है। इस बीच इसके समीप ही फिर से परकोटा ढहा है।