Karoli क्षेत्रफल के साथ बढ़ रहा सरसों का उत्पादन, तेल इकाइयां बढ़ाने की जरूरत
राज्य सरकार ने औद्योगिक नगरियों से बाहर जिलों में उद्योग लगाने के लिए राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट से प्रदेश में विकास की नई शुरुआत की है। लेकिन कच्चे माल की बहुलता के क्षेत्र में उसी से संबंधित उद्योग लगेे तो औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसरों की दोगुनी रतार हो सकती है। करौली जिले में अन्य फसलों की तुलना में सर्वाधिक सरसों की फसल होती है। कम लागत व अधिक दाम होने से किसानों का सरसों की खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
इस बार रबी की फसली सीजन में जिले के करौली, हिण्डौन, नादौती, टोडाभीम, सपोटरा सहित अन्य क्षेत्र में 1 लाख 11 हजार हैक्टेयर भूमि में सरसों की फसल की बुवाई हुई है। जो इन दिनों सरसों के दानों से भरी फलियों से लकदक है। इसके बावजूद जिले में बड़ी ऑयल मिलों की संया है। 60-70 छोटे स्पेलरों के अलावा हिण्डौन रीको औद्योगिक क्षेत्र में 5 व करौली में एक बड़ी ऑयल मिल है।ऑयल मिलों की संया कम होने से जिसे अधिकांश सरसों हिण्डौन कृषि मंडी के जरिए दूसरे राज्यों की बड़ी मिलों के लिए ट्रेडिंग होती है। यदि उत्पादन के अनुरूप ऑयल मिल खुुलें तो जिले को सरसों तेल उद्योग के रूप में पहचान बन सकती है।
सात माह चलती हैं मिलें
सरसो तेल उद्यमी मुकेश बंसल ने बताया कि क्षेत्र में सरसों ऑयल की मध्यम औद्योगिक यूनिट हैं। सीजन में मंडी में सरसों की बपर आवक होती है। समीप के जिलों में भरतपुर, अलवर, कोटा व बूंदी में बड़ी ऑयल मिल हैं। यहां फरवरी माह में नई सरसों के आने से मई माह तथा दीपावली से मकर संक्रांति तक तेल मिल चलती हैं। बड़ी मिलें लगें तो क्षेत्र में सरसों ऑयल उद्योग विकसित हो सकता है। हालांकि इनमें एक मिल बड़ी भी है।
