Karoli जलभराव से मकानों में आई आई दरारें, फर्श भी धंसे
करौली न्यूज़ डेस्क, अतिवृष्टि के रूप में आई आपदा का दौर भले की खत्म हो गया है, लेकिन उसके खतरे भरे निशान लोगों को चिंतित कर रहे हैं। शहर में बाढ़ जैसे हालातों में जलभराव से मकानों की दीवारों में में बड़ी दरारें बन गई हैं।वहीं घर और दुकानों में फर्श धंस गए हैं। स्थिति यह है कि प्रभावित क्षेत्र के आशियानों में आंशकाओं के चलते लोग चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं।करीब एक सप्ताह तक आधे शहर के जलमग्न रहने से डेढ़ दर्जन से अधिक मोहल्लों व कॉलोनियों के अलावा बाजार क्षेत्र में भवनों को काफी नुकसान हुआ है। जलभराव से भूमिगत मिट्टी के कटाव व धंसने से मकानों की नींव कमजोर हो खिसक गई।
इससे घरों की दीवारों में बड़ी दरारें आ गई। शहर में जल निकासी के बाद आपदा का जोर हल्काने के बाद नजर आए खतरे भरे निशानों ने सामान्य होते हालातों के बीच लोगों चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में घर के भीतर जोखिम की दस्तक से चौकस हुए लोग बचाव के जतन में जुट हैं। गौरतलब है 12 अगस्त से शुरू हुए अतिवृष्टि के दौर में शहर के बाजार क्षेत्र के आलावा जाटव बस्ती, जाट की सराय, दुब्बे पाड़ा, चौबे पाड़ा, सीताबाड़ी, ईदगाह कॉलोनी, केशवपुरा, माली पाड़ा सहित कई मोहल्लों में जलभराव रहा था। इससे मकानों की दीवारें दरक गई। ऐसे में लोगों को अब अपने ही घरों में रहने में जान की जोखिम की डर सता रहा है। इधर शहर के लोगों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से जलभराव क्षेत्र में मकानों में नुकसान और जोखिम की स्थिति का सर्वे कराने की मांग की है।
जोखिम का रहता डर : रियासत कालीन पुराने भवन भी बाढ़ जैसी आपदा के निशानों अछूतों नहीं रहे हैं। पुरानी कचहरी के पास जलभराव नहीं होने के बाद भी मकानों में दरारें आ गईं। कोर्ट पाड़ा निवासी रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि उनके मकान में दीवारों व छत पर दरारें पड़ गई है। वहीं सीताबाड़ी के बरकत नगर में भी कई घरों व दुकानों के फर्श धंसने से दीवारें सतह से अधर हो गई हैं।
