Karoli हादसे की वजह न बन जाए ये अनदेखी, गांवों में खुले पडे़ सूखे कुएं
Dec 30, 2024, 10:30 IST
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली दौसा के गांव काली खाड़ और कोटपुतली में बोरवैल के हादसे के बाद भी लोग सावचेत नहीं हुए हैं। क्षेत्र में खेतों और आवाजाही के रास्तों के पास सूखे बोरवैल व कुएं खुले पड़े हैं। इनको लेकर न तो खेत-कुआं मालिक जागरूक है न प्रशासन गंभीर है। वहीं यह अनदेखी किसी हादसे की वजह न बन जाए। स्थिति यह है कि गांवों में अधिकांश सूखे कुए भूमि लेवल होने से असुरक्षित बने हैं। दरअसल चार-पांच दशक पहले तक भूजल स्तर ऊपर होने से क्षेत्र सिंचाई और पेयजल के साधन कुएं ही थे। भूजल स्तर गिरने पर कुएं सूख गए और लोगों ने खेतों में नलकूप खुदवाना शुरू कर दिया। जलस्तर में गिरावट का सिलसिला जारी रहने ने लोगों ने फसल की सिंचाई की पर्याप्तता के लिए एक ठप होने पर दूसरे नलकूप खुदवा लिए और सूखे कुओं और बोरवैलों को अनदेखा छोड़ दिया। स्थिति यह है गहराइयों तक पानी नहीं मिलने पर बोरवैल को अधूरा छोड़ दिया जाता है। ऐसे में वर्षों से अनुपयोगी माने हुए सूखे कुएं व बोरवैल कामोबेश हर गांव में आधा से एक- दर्जन हैं। उपखण्ड क्षेत्र के पहाड़ी क्षेत्र के गांव बझेड़ा, सिंघान सहित आस पास के गांवों में पुराने कुए अधिक हैं। कई जगह बोरवैल खुले होने का मामले भी सामने आए हैं। जिससे हादसे की आशंका है।
गांवों में युवा कर रहे जागरूक : कुए व बोरवैल के हादसों को लेकर क्षेत्र के गांव बझेड़ा के युवाओं की टीम लोगों को जागरूक कर रही है। उनको ढकवाने के प्रयास कर रहे हैं। लोकेश बझेड़ा व जीतेश मीणा सहित कई युवा क्षेत्र के गांवों में पहुंच खुले कुए व बोलवैलों को देख किसानों को उन्हें मिट्टी से भरवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।लोकेश ने बताया बझेड़ा की जाटव बस्ती में बोलवैल खुला पड़ा था, वहीं अटल सेवा केन्द्र के पास सड़क किनारे जर्जर पुराना कुआं हादसे को न्योता दे रहा है।
