Karoli दीपावली के त्योहारी सीजन में दुकानें सजना शुरू
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली शहर की बसावट के समय का नीम का बाजार अपने अस्तित्व को संवारे हुए है। तीन सौ वर्ष पुराना यह बाजार मिठाइयों की महक से गुलजार है। दीपावली के त्योहारी सीजन में यहां सबसे ज्यादा दुकानें सजती हैं। यही वजह है कि कई किलोमीटर दूर नई कॉलोनियों में बसे लोग भी मिठाइयों की खरीदारी के लिए यहां आते हैं। नगर आराध्य देव हरदेवजी व राधारमणजी के मंदिर के बीच स्थिति नीम का बाजार शहर से सहित आस-पास के गांवों का खरीद केन्द्र रहा है। शहर की बसावट पुरानी आबादी क्षेत्र तक सीमित होने से मिठाई के स्वाद और नमकीन के चटखारे लेने के साथ लोग घरेलू सामान की खरीदारी के लिए यहीं आते थे। शहर के विस्तार के साथ भले ही अन्य इलाकों में बाजार विकसित हो गए हैं, लेकिन नीम के बाजार को लेकर लोगों में वहीं पुराना रुझान कायम है।
शहर के सबसे पुराने बाजारों में शुमार नीम का बाजार में मिठाई, नमकीन, हलवाई, दवाई, चाय, पान, पंसारी, गजक, किराना, कॉस्मेटिक, नाई, लाख चूड़ी की दुकानों सहित मावे की आढ़त का करोबार है। हलवाई दीनदयाल बागरैनिया ने बताया कि बाजार में मिठाई की 10 दुकानें है। दीपावली पर बाजार में कतारबद्ध छह फड़ लगते हैं। जो अन्य बाजारों की तुलना में सर्वाधिक है। पुश्तैनी हलवाई विनोद मजिया व ललित मोहन धाकड़ ने बताया कि बाजार में हरदेवजी व राधारमणजी मंदिर में आरती के समय सुबह से दोपहर तक व शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक दर्शनार्थियों की आवक रहती है। इस समय बाजार में खूब खरीदारी होती है।
मूंग की बर्फी व गजक के लिए यात : शहर के लोगों की माने तो नीम का बाजार दोनों मंदिरों के अलावा मूंग की बर्फी व तिल की गजक के लिए यात है।पुश्तैनी का कारोबार के तौर पर करीम की गजक, बाला-मनोहरी की मूंग की बर्फी व छत्तू की नमकीन बाजार को पहचान को सवारे हुए है।
