Aapka Rajasthan

Karoli रेकॉर्ड सीज, बिल अटके, वेतन में देरी की आशंका

 
Karoli रेकॉर्ड सीज,  बिल अटके, वेतन में देरी की आशंका
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली जिले का आयुर्वेद महकमा इन दिनों चर्चा में है। असल में पिछले दिनों विभाग के दो कार्मिकों द्वारा विभागीय सेवानिवृत्त तीन अधिकारी-कार्मिकों के नाम से 73 लाख रुपए से अधिक की राशि का गबन का मामला सामने आया था, जिसके बाद मामले में प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी। हालांकि अभी पुलिस की जांच चल रही है। वहीं दूसरी ओर यह प्रकरण सामने आने के बाद आयुर्वेद विभाग के उप निदेशक सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के संयुक्त हस्ताक्षरों से दोनों आरोपी कार्मिकों वाले कक्ष को 12 जुलाई को सीज कर दिया गया। कमरा सीज होने से पेंशनरों के प्रकरण, अनुकंपा नियुक्ति संबंधी प्रकरण, वेतन बिल नहीं बन पा रहे हैं, जिससे जिले के अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं मिल पाने पर संशय बना हुआ है। आयुर्वेद विभाग में जिले में करीब 80 चिकित्सक, 70 कंपाउंडर तथा करीब 30 सहायक कर्मचारी हैं। इन सभी अधिकारी-कर्मचारियों का मासिक वेतन करीब डेढ़ करोड़ बनता है। इसके अलावा कई कार्मिकों ने बैंक व अन्य संस्थाओं से लोन ले रखा है जिससे अब उन्हें पेनल्टी चुकाने की समस्या होगी।

जुलाई माह में कार्मिकों के इंक्रीमेंट लगते हैं। इस कार्य में भी देरी होने के साथ पीएल सरेंडर का भुगतान भी समय पर नहीं हो सकेगा। हालांकि ऑफिस के अन्य कार्यों के सुचारू संचालन के लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तुलसीपुरा से डॉ. नंदकुमार शर्मा सहित अन्य स्टाफ कार्मिकों को कार्य व्यवस्थार्थ नियुक्त किया है।

कार्मिकों के बयान हुए न पहुंची टीम: मामले में विभाग के उप निदेशक की ओर से 20 जुलाई को एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें उप निदेशक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक मुकेश कुमार शर्मा तथा कनिष्ठ सहायक सुरेश चंद मीणा पर सेवानिवृत्त चिकित्सक राजेंद्र कुमार शर्मा के नाम से 40 लाख 54 हजार 162 रुपए, धनवंतरी कॉलोनी गंगापुर सिटी निवासी सेवानिवृत्त चिकित्सक के नाम से 6 लाख 63 हजार 444 रुपए तथा कंपाउंडर बाबूलाल बैरवा के नाम से 25 लाख 97 हजार 280 रुपए अन्य खाते में डलवाकर राशि का आहरण करने का आरोप लगाया गया था। लेकिन मामले की जांच धीमी गति से चलने से अब तक किसी भी कार्मिक के बयान तक नहीं हुए हैं। वहीं दूसरी विभाग के निदेशक आनंद कुमार शर्मा ने एक सप्ताह में टीम को करौली भेजकर जांच करने की बात कही थी, लेकिन 10 दिन बाद भी विभागीय टीम भी यहां नहीं पहुंची है। रेकॉर्ड या दस्तावेजों में हेराफेरी की आशंका से उप निदेशक कार्यालय में चार सहायक कर्मचारियों की भी तैनातगी की गई है।