Karoli ऑक्सीजन प्लांट की हुई मरम्मत, अब ऑक्सीजन मानकों पर खरी उतर रही
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली जिला चिकित्सालय में ऑक्सीजन प्लांट से निर्मित प्राणवायु चिकित्सा विभाग के मानक पैमाने पर अब खरी उतरने लगी है। हालांकि अभी एक प्लांट की ऑक्सीजन ही मानक अंक तक पहुंच पा रही है। जबकि दो अन्य प्लांटों को गुणवत्ता की परख के लिए ट्रायल पर चलाया हुआ है। आठ महिने से बंद पड़े तीनों ऑक्सीजन प्लांट के गत माह शुरू होने पर चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होने को लेकर मामला उठाया था। 12 नवबर को अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांटों से बनी प्राणवायु 70 से 80 फीसदी की खरी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
जिसमें प्लांटों ऑक्सीजन के मेडिकल स्टैंडर्ड पर खरी नहीं होनेे से सिलेण्डरों का प्रयोग करने की मजबूरी को उजागर किया था। इस पर जिला चिकित्सालय प्रशासन की सूचना पर राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम की ओर से सर्विस व मरमत के लिए तय की हुई नई दिल्ली की पीएएस कपनी जीकेएस के इंजीनियरों ने गत दिनों आकर प्लांटों का रखरखाब किया। इस दौरान रील कपनी का 100 सिलेण्डर क्षमता के प्लांट में निर्तिमत ऑक्सीजन 93 फीसदी शुद्धता को पहुंच गई। जिससे वार्डों में भर्ती रोगियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति देना शुरू कर दिया है। जबकि धवन व यूनिसी कपनी द्वारा स्थापित किए 24 और 75 सिलेण्डर क्षमता के प्लांटों को ट्रायल पर चलाकर उत्पादित ऑक्सीजन की गुणवत्ता जांची जा रही है।
निर्बाध बिजली मिले तो कायम रहे शुद्धता
ऑक्सीजन प्लांट सुपरवाइजर ने बताया कि ऑक्सीजन की शुद्धता कायम रखने के लिए प्लांट का लगातार संचालित होना जरुरी है। चिकित्सालय में एक्सप्रेस फीडर होने के बाद भी कई बार बिजली बंद होती है। ऐसे में फिर से प्लांट स्टार्ट होने पर ऑक्सीजन की मानक गुणवत्ता तक पहुंचने में समय लगता है। मरमत होने के बाद प्लांटों में निर्मित ऑक्सीजन की शुद्धता सुधरी है। एक प्लांट से संचालित ररख वार्डों में आपूर्ति भी दी जा रही है। शुद्धता गड़बड़ाने की स्थिति में मैनीफोल्ड यूनिट में सिलेण्डर मंगवा कर रखे हुए हैं।
