Karoli रासायनिक खाद के अधिक उपयोग से हो रहा नुकसान, पैदावार पर विपरीत असर
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली अधिक पैदावार के चक्कर में कुछ वर्षों से किसान खेती में रासायनिक खादों का बहुत अधिक उपयोग करने लगे हैं। जिससे खेती की पैदावार पर विपरीत असर पड़ रहा है। साथ ही मिट्टी लवणीय यानि क्षारिय होती जा रही है। किसान यूरिया, डीएपी, सुपरफॉस्फेट आदि का बहुत अधिक मात्रा में उपयोग करने लगे हैं। अब से एक दशक पूर्व किसान एक हैक्टेयर में बीस किलो यूरिया व आठ से दस किलो डीएपी का सिंचाई के साथ बुवाई में उपयोग करते थे, लेकिन गत कुछ वर्षों से किसान सिंचाई के समय एक बीघा में एक कट्टे से अधिक यूरिया व बुवाई में बीस से पच्चीस किलो डीएपी का उपयोग करने लगे हैं। किसानों में रसायनिक खाद अधिक से अधिक देने की होड मची है। किसान खेती में देशी गोबर की खाद का उपयोग नहीं के बराबर कर रहे हैं। ऐसे में रासायनिक खाद के उपयोग से भूमि बंजर होती जा रही है। जमीन की घटती उर्वरा शक्ति के कारण उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान रासायनिक खादों की मात्रा प्रति वर्ष बढ़ाते जा रहे है।

किसानों ने बताया कि पहले मॉड क्षेत्र में बिना पानी के बारानी खेती होती थी। लेकिन अब किसी साल बरसात नहीं हो और फॉर्म पौण्ड नहीं भरे तो सिंचाई नहीं होने की स्थिति में जमीन में एक दाना भी पैदा नहीं हो पाता है। पहले किसान पारंपरिक खेती के दौरान खेत की जुताई के लिए बैलों का उपयोग करते थे, लेकिन जब से खेती में आधुनिकता व रासायनिक खादों का उपयोग होने लगा है फसल पर विपरीत असर पड़ने लगा है।
