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Karoli जगमगाने लगे घर, कम्प्यूटरीकृत मशीनों से बनाए जा रहे कलर शेड

 
Karoli जगमगाने लगे घर, कम्प्यूटरीकृत मशीनों से बनाए जा रहे कलर शेड

करौली न्यूज़ डेस्क, नवरात्र पूजा के बाद अब दीपोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई है। साफ-सफाई कर लोग घरों को खूबसूरत रंगों से संवारने में जुट गए है। पड़ोसी से अलग लुक देने के लिए लोग परपरागत से अलग हट नई शेड और शाइनिंग देकर चमका रहे हैं। इसके लिए कप्यूटराइज्ड कलर मेकिंग मशीनों से कैटलॉग कलर तैयार किए जा रहे हैं। घरों में रंगाई-पुताई का काम जोर पकडऩे से अब पेंट्स और डिस्टेपर का कारोबार भी परवान चढऩे लगा है।

दरअसल इस बार बारिश दौर लबा रहने से रंगाई-पुताई का दौर देरी से शुरू हुआ है। आमतौर पर श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिनों में घरों में रंगाई पुताई तैयारियां शुरू हो जाती थी। स्टेशन रोड स्थित रंग पेंट के दुकानदार देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि लोग बाजार में अपनी पसंद के मुताबिक पेंट खरीद रहे हैं। कंपनियों ने भी ग्राहकों की पसंद व मांग के अनुरूप आपूर्ति तेज कर दी है। पहले लोग अपने घर को पेंट कराने के लिए चूना-कलई, पीली मिट्टी, और सामान्य डिस्टेंपर का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब प्लास्टिक पेंट और ट्रेक्चर (दानेदार) रंग का चलन आ गया है। नई मंडी स्थित रंग पेंट्स के व्यापारी प्रकाश चंद व दिनेश चंद ने बताया कि पहले रंग पेंट का काम चुनिंदा रंगों तक सीमित था। लेकिन अब कप्यूटराइज मशीन से टिंट से सैंकड़ों प्रकार की शेड्स में रंग तैयार किए जा रहे हैं।

सीलन से बचाव के लिए प्लास्टिक पेंट बना पसंद : दुकानदारों ने बताया कि इस बार लोग घरों में सामान्य इमल्शन पेंट कराने की बजाय प्लास्टिक पेंट पसंद कर रहे हैं। इसकी वजह आम पेंट की तुलना में प्लास्टिक पेंट ज्यादा दिनों तक टिकता है। एक बार इससे पुताई करने के बाद कई साल की छुट्टी हो जाती है। खास बात यह है कि प्लास्टिक पेंट की दीवारें ज्यादा गंदा नहीं होती हैं। वहीं नमी से भी बचाव करता है और सीलन नहीं आने से चमक भी बरकरार रहती है। अब रंग पेंट की अनेक कपनियां : करीब 60 वर्ष से रंग-पेंट का कारोबार कर रहे पूरणचंद गुप्ता ने बताया कि पहले एक-दो कपनी के रंग पेंट आते थे। इस अनेक कंपनियों ने दर्जनों प्रकार के रंग पेंट्स बाजार में आ गए हैं।