Karoli पांच साल में बाजरे का भाव अन्य जिंसों से लगभग दोगुना हो गया
दरअसल पहले बाजरे की खपत मुयत: दक्षिण भारत के राज्यों में मुर्गी दाना व कैटल फीड़ निर्माण में होती थी। खाद्यान्न के तौर पर सर्दियों में ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में खाद्यान्न के तौर पर प्रयोग होता है। बीत वर्षों में हुए परीक्षणों में बाजरा में गेहूं व अन्य खाद्यान्नों की तुलना में अधिक पौष्टिक तत्व साबित होने से लोगों में इसके खाने के प्रति रुझान बढ़ा है। हालांकि मुय खाद्यान्न के अभी गेहूं ही है। कृषि उपज मंडी सूत्रों के अनुसार वर्ष 2020-21 में 4 लाख 26 हजार 594 क्विंटल बाजरा की आवक हुई थी। उस दौरान बाजरा के भाव 1330 रुपए प्रति क्विंटल रहे। इस वर्ष अप्रेल माह से फसली सीजन सहित अक्टूबर माह तक सात माह में 2 लाख 56 क्विंटल बाजरा की आवक हुई है।व्यापारियों के अनुसार अन्य जिंसों में भाव भले ही अधिक बढ़े हैं, लेकिन बढ़त दर में बाजरा दोगुने दामों के करीब पहुंचने में अन्य जिंसों से आगे है।
गत वर्ष गेहूं के समान पहुंचे बाजरा के भाव
कृषि उपज मंडी समिति के सुपरवाईजर पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि वर्ष 2023-24 में गेहूं व बाजरा के औसत भावों में काफी कम अंतर रहा। मंडी में बाजरा की आवक 5 लाख 33 हजार 154 क्विंटल व गेहूं की आवक एक लाख 74 हजार 456 क्विंटल रही। ऐसे में बाजरा के भाव 2190 रुपए व गेहूं के भाव 2186 रुपए प्रति क्विंटल रहे।
