Karoli 44 घंटे बाद परिवार के सभी चार मृतकों के शव परिजनों को किए सुपुर्द
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली कुड़गांव थानांतर्गत सलेमपुर कस्बे में अंबेडकर छात्रावास के समीप हाइवे पर मंगलवार को निजी बस और कार के बीच हुई भिड़ंत में कार सवार पांच जनों में से एक ही परिवार के चार शवों का गुरुवार को पोस्टमार्टम हो सका। इसके बाद पुलिस ने शवों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। कुड़गांव थानाधिकारी रुक्मणि गुर्जर ने बताया कि पांच मृतकों में से एक महिला के शव को 25 दिसंबर को परिजनों के सुपुर्द कर दिया था, जबकि गुरुवार को एक ही परिवार के सभी चार जनों के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द किया गया। परिजनों ने बताया कि इंदौर पहुंचने के बाद शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। गौरतलब है, कि गुजरात के बड़ौदरा शहर से इंदौर (मध्यप्रदेश) आई अपनी बहन के साथ राजस्थान के धार्मिक स्थलों के लिए निकले कार सवार एक ही परिवार के सभी चारों सदस्यों सहित पांच जनों की 24 दिसंबर को शाम करीब साढ़े 7 बजे कुडग़ांव थानांतर्गत सलेमपुर के पास निजी बस की आमने-सामने की भिड़ंत में मौत हो गई थी।
गुरुवार को हुआ मृतका प्रीति का अंतिम संस्कार : हादसे की सूचना मिलने पर प्रीति के पति तथा उनका बेटा बुधवार को सामान्य चिकित्सालय करौली पहुंचे और निजी बस चालक के खिलाफ लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर टक्कर मारने का मामला दर्ज कराने सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को लेकर बड़ौदरा चले गए। वहीं मृतक नयन देशमुख की तलाकशुदा पत्नी की बेटी ने आने की पुलिस को जानकारी दी। ऐसे में अन्य चार शवों को परिजनों के आने के इंतजार में मोर्चरी में रखा गया।
हालांकि मृतक नयन देशमुख परिवार की कॉलोनी में रहने वाले समाजसेवी योगेश चौधरी, रोहित मावले और सुशील गौर 25 दिसंबर को चिकित्सालय पहुंचे। इस दौरान उन्हें जानकारी मिली कि मृतक की तलाकशुदा पत्नी तथा उनकी बेटी के आने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द किए जाएंगे। अंतिम संस्कार व ले जाने पर हुआ गतिरोध : चिकित्सालय में जहां मृतका अनीता उर्फ जयश्री की बहन किरण चारों शवों को इंदौर ले जाने की बात कह रही थी,वहीं नयना व उसकी एडवोकेट दोस्त अंतिम संस्कार करौली में ही कराए जाने की बात कह रही थीं। करीब 3 घंटे तक चले गतिरोध के बाद चारों मृतकों के शवों को दोनों पक्षों की ओर से इंदौर ले जाने पर सहमति बनी।पुलिस ने इंदौर से आए परिजनों को मोर्चरी में शवों की शिनात कराई। अपने परिजनों का क्षत-विक्षत शव देखकर किरण और करूणा की आंखों से आसुंओं का सैलाब छलक उठा और उनकी रुलाई फूट पड़ी। मां-बेटी गले लगकर रोने लगीं, वहीं करुणा को निधि ने दिलासा दिलाई।
