Karoli जेरिएट्रिक वार्ड बना जनरल वार्ड, बुजुर्गों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ
करौली न्यूज़ डेस्क, जिला चिकित्सालय में एकल बुजुर्गों के उपचार के लिए स्थापित किया वातानुकूलित जीरियाट्रिक वार्ड राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा है। मेडिकल यूनिट के अधीन संचालित इस वार्ड में सामान्य रोगियों के भर्ती किया जाता है। इससे जीरियाट्रिक वार्ड का स्वरूप जनरल वार्ड सा हो गया है। ऐसे में एकल वृद्धजन रोगियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मौजूदा दशक को स्वस्थ वृद्धावस्था दशक घोषित किया हुआ है। राष्ट्रीय बुजुर्ग देखभाल कार्यक्रम के तहत वृद्धजनों को विशेष चिकित्सा सेवाएं देने को राज्य सरकार ने इसे 100 दिवसीय कार्ययोजना के शामिल किया था।
ऐसे में जिला चिकित्सालय में फरवरी माह में 24 पलंग क्षमता के मेडिकल वार्ड में एक कक्ष में 10 पलंग आरक्षित कर जीरियाट्रिक वार्ड स्थापित कर रामाश्रय का नाम दिया। और एक मार्च से रिकॉर्ड में वृद्धजनों के लिए गाइड लाइन के तहत जीरियाट्रिक वार्ड का संचालन शुरू कर दिया। लेकिन धरातल पर पुरुष मेडिकल वार्ड में महज 14 पलंगों के अपर्याप्त होने से सामान्य रोगियों को जीरियाट्रिक वार्ड में भर्ती कर उपचार करना पड़ रहा है। शुरुआत में चंद दिन व्यवस्थित रहे जीरियाट्रिक वार्ड की स्थिति भीड़ भरे जरनल वार्ड जैसी हो गई है। ऐसे में वृद्धजनों को भीड़ से अलग की बजाय भीड़ के बीच उपचार लेना पड़ रहा है। जीरियाट्रिक में भी एक पलंग पर दो रोगी: वृद्ध जनों को भीड़ से अलग उपचार के लिए स्थापित जीरियाट्रिक वार्ड भी इन दिनों भीड़ भरा हो रहा है। 10 पलंगों के वार्ड के रिकॉर्ड में भले 4-5 रोगी भर्ती हैं, लेकिन मेडिकल वार्ड के रोगी भर्ती होने एक पलंग पर दो रोगी भर्ती करने होते हैं। शनिवार सुबह 11 बजे पंजिका में 3 रोगी दर्ज थे, जबकि वार्ड में 12 रोगी उपचाराधीन थे।
