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Karoli कुभकार चाक पर दीयों को दे रहे आकार, सजने लगा दीपोत्सव का बाजार

 
Karoli कुभकार चाक पर दीयों को दे रहे आकार, सजने लगा दीपोत्सव का बाजार
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली दशहरा निकलने के बाद अब दीपावली की तैयारियां तेज हो गई है। दीपोत्सव पर घर आंगन रोशन करने के लिए कुहारों के चाक ने रतार पकड़ ली है। माटी के दीयों से घरों के जगमग करने की परपरा के चलते इन दिनों कुभकार शहर मेें हर रोज विभिन्न हजारों दीयों का निर्माण कर रहे हैं।आधुनिकता के दौर में भले घर और प्रतिष्ठानों को विद्युतचालित झालरों से रोशन किया जाता है। लेकिन आस्था और परपरा के चलते धन की देवी महालक्ष्मी का स्वागत और पूजा के लिए माटी के दीयों की टिमटिमाती लौ से घरों को जगमग किया जाता है। इसके चलते शहर में त्योहारी सीजन की दस्तक के साथ ही दीये बनाने काम में तेजी आई है। मण्डावरा फाटक के पास स्थित प्रजापति कॉलोनी के महेश प्रजापत ने बताया कि विद्युत चालित चाक आने से दीपक बनाने में सहूलियत हुई है। हाथ के चाक की तुलना में 25-30 प्रतिशत अधिक दीपकों का अधिक निर्माण होता है। शहर में शाहगंज, मटिया महल क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक कुभकारों के घरों के आलावा समीप के मण्डावरा, गोपीपुर, रेवई, ढिंढोरा आदि दीपावली के लिए दीयों का निर्माण हो रहा है।

खदानों में जलभराव से मिट्टी का टोटा : कुभकारों ने बताया कि इस बार दीपक बनाने के लिए माटी का टोटा बना हुआ है। अतिवृष्टि से चिकनी मिट्टी की खदानों में पानी भरा है। ऐसे में शहर में बयाना व आसपास के गांवों से मिट्टी मंगवाई जाती है।

साबूती प्रजापत ने बताया कि यूं तो दीपावली पर हर आकार के दीये बनाए जा रहे हैं। लेकिन त्योहार पर सबसे छोटे आकार के नैनो दीयों की ज्यादा मांग रहती है। ये दीये मकानों की छत की मुडेर दीपमालिका सजाने एवं घर-घर दीप जलाने के काम आते हैं। हालांकि नैनो दीयों को बनाने में अधिक समय लगता है।

लुभा रहे डाई से निर्मित दीपक

चाक पर निर्मित परपरागत दीयों के अलावा बाजार में डाई से निर्मित दीपक भी लोगों लुभा रहे हैं। विभिन्न डिजायनों के दीपक आम तौर पर गुजरात से मंगाए जाते है। खासबात यह है कि दीपकों को पेंट से रंग कर कलरफुल लुक भी दिया गया है।