Karoli कुभकार चाक पर दीयों को दे रहे आकार, सजने लगा दीपोत्सव का बाजार
खदानों में जलभराव से मिट्टी का टोटा : कुभकारों ने बताया कि इस बार दीपक बनाने के लिए माटी का टोटा बना हुआ है। अतिवृष्टि से चिकनी मिट्टी की खदानों में पानी भरा है। ऐसे में शहर में बयाना व आसपास के गांवों से मिट्टी मंगवाई जाती है।
साबूती प्रजापत ने बताया कि यूं तो दीपावली पर हर आकार के दीये बनाए जा रहे हैं। लेकिन त्योहार पर सबसे छोटे आकार के नैनो दीयों की ज्यादा मांग रहती है। ये दीये मकानों की छत की मुडेर दीपमालिका सजाने एवं घर-घर दीप जलाने के काम आते हैं। हालांकि नैनो दीयों को बनाने में अधिक समय लगता है।
लुभा रहे डाई से निर्मित दीपक
चाक पर निर्मित परपरागत दीयों के अलावा बाजार में डाई से निर्मित दीपक भी लोगों लुभा रहे हैं। विभिन्न डिजायनों के दीपक आम तौर पर गुजरात से मंगाए जाते है। खासबात यह है कि दीपकों को पेंट से रंग कर कलरफुल लुक भी दिया गया है।
