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Karoli बाजरे की बंपर पैदावार की उम्मीदों पर फिरा पानी

 
Karoli बाजरे की बंपर पैदावार की उम्मीदों पर फिरा पानी

करौली न्यूज़ डेस्क, करौली  क्षेत्र में पिछले दिनों लगातार एक माह से अधिक समय तक हुई भारी वर्षा से खेतों में बाजरे की फसल को ग्रहण लग गया है। तिल को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों द्वारा बाजरा, तिल आदि खरीफ की फसलों की कटाई शुरू कर दी। बाजरे की कडबी गल कर काली पड़ गई है। जिसे जानवर किसी भी हालत में खा नहीं सकता। ऐसी स्थिति में किसानों को चारा व अनाज की समस्या से परेशान होना पड़ेगा। फसलों के खराब होने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। उनको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा।

बाजरे की उपज को अधिक नुकसान पहुंचा है। जिस खेत में दस क्विंटल बाजरा होना था वहां डेढ़ दो क्विंटल बाजरा भी पैदा होना मुश्किल हो गया है। उसका दाना काला पड़ जाने से खाने योग्य नहीं है। क्षेत्र में लंबे समय से ओवरफ्लो हो रहे बांध तालाब, खेत तलाई आदि से लगातार पानी की निकासी की जा रही है। लेकिन पानी की आवक कम पड़ने का नाम नहीं ले रही है। किसानों की ओर से जुलाई माह में बोई गई तिल, बाजरा,ज्वार, मूंग, मोठ आदि की फसल खेतों में एक माह से अधिक समय तक पानी का भराव रहने से काफी मात्रा में फसल गल कर खराब हो गई है। यही नहीं अभी भी बरसात का मौसम बनी हुआ है। जिससे किसानों में चिंता है। गोपाल मीना, रामचरण पटेल, प्रगतिशील किसान भंवर सिंह चौहान, राजाराम गुर्जर, रामसहायक सैनी आदि ने बताया कि लगातार बरसात ने इस बार फसल बर्बाद कर ली है।

कई जगह खेतों में अभी भी काफी पानी भरा हुआ है। जिससे आगामी रबी की पैदावार भी मुश्किल लग रही है। हालांकि अब किसान रबी की फसल की आस लगा कर बैठा है। लेकिन अतिवृष्टि के कारण रबी की बुवाई प्रभावित होने से किसान मायूस हैं। किसानों ने बताया कि मॉड क्षेत्र के अधिकांश गांवों में सितम्बर माह में किसान सरसों की बुवाई के लिए अपने खेतों की जुताई शुरू कर देता है। सितम्बर के अंतिम सप्ताह तक जमीन को तैयार कर माह के अंतिम सप्ताह व अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में बुवाई शुरू कर देता है। इस समय पर बोई गई सरसों की फसल में चैंपा आदि रोग लगने की बहुत कम संभावना रहती है। वहीं उत्पादन भी अच्छा होता है। इस बार तो बरसात की वजह से निकट भविष्य में खेतों की जुताई के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। माड क्षेत्र में काली चिकनी मिट्टी होने की वजह से रबी की फसल के लिए जुताई में दिक्कत आएगी। क्योंकि खेतों में पानी भरा हुआ है। मिट्टी जुताई के योग्य नहीं है। यदि अब फिर बरसात हो गई तो शेष बची खरीफ की फसल भी चौपट हो जाएगी।