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Karoli नहीं बना सके कपोस्ट खाद, शहर में आर्गेनिक कचरे के लगे ढेर

 
Karoli नहीं बना सके कपोस्ट खाद, शहर में आर्गेनिक कचरे के लगे ढेर
करौली न्यूज़ डेस्क , करौली शहर में सफाई और आर्गेनिक कचरे से जैविक खाद बनाने के लिए स्वच्छता मिशन के तहत लगाए गए जैव मिथेनेशन संयंत्र अनदेखी से जंग खा रहे हैं। छह वर्ष से संचालित नहीं होने से लाखों रुपए की लागात से स्थापित संयंत्र कचरे का निस्तारण करने की बजाय खुद कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। स्थिति यह कि कीचड़-गंदगी के बीच पड़ी कपोस्ट खाद बनाने की ये मशीन जिमेदारों की जवाबदेहिता का हाल बयां कर रहीं हैं।

दरअसल शहरी निकायों में ऑर्गेनिक वेस्ट (सब्जी, गोबर व वनस्पति जन्य कचरा) की गंदगी से निजात दिलाने व उससे कपोस्ट खाद बनाने के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने जैव मिथेनेशन संयंत्र भिजवाए थे। इसके तहत वर्ष 2019 में हिण्डौन नगर परिषद को भी विद्युत चालित दो संयंत्र मुहैया कराए गए। उस दौरान नगर परिषद प्रशासन ने सर्वाधिक उपयोगिता तय कर एक संयंत्र गोपाल सब्जी मंडी व दूसरे को पशुपालन बाहुल्य क्षेत्र गोशाला के पास जांगिड़ धर्मशाला के सामने स्थापित किया था। नगर परिषद प्रशासन ने सब्जी मंडी में स्थापित संयंत्र को विद्युत कनेक्शन लेकर एकाध माह के लिए शुरू किया, लेकिन केशवपुरा में बिजली के अभाव में ठप रहा जैव खाद का संयंत्र क्षतिग्रस्त होकर कबाड़ बन गया है। लोगों को इन संयंत्रों की उपयोगिता का पता तक नहीं है।

निदेशालय स्तर से आए, कपनी पर था जिमा

नगर परिषद सूत्रों के अनुसार स्वायत्त शासन विभाग निदेशालय ने जयपुर की बिजसन इनोवेशन्स प्रा.लिमिटेड कपनी से दो जैव मिथेनेशन संयंत्र भिजवाए थे। साथ ही 3-4 वर्ष के लिए संयंत्रों के संचालन और रखरखाव का जिमा कपनी को दिया गया। शुरुआत में कपनी से लगाए कार्मिकों ने एक प्लांट को एकाध माह ही चलाया था।

कम क्षमता होने से सिमटी मंशा

सूत्रों के अनुसार निदेशालय से भिजवाए जैव मीथेनेशन प्लांटों की क्षमता 100 किलोग्राम थी। यानी हॉपर से सब्जी,फल व गोबर को डालने पर 5-6 घंटे की प्रक्रिया से 100 किलोग्राम कचरे का कपोस्ट खाद तैयार होता है। ऐसे में छोटी मशीन होने और कई टन कचरा होने से कपनी और नगर परिषद ने संयंत्रों के संचालन पर ध्यान नहीं दिया। सब्जी मंडी से लेकर अनेक स्थानों पर हर रोज जैव कचरे के ढेर लगते हैं, जिसे शहर के बाहर निस्तारित किया जाता है।