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Karoli 330 निजी स्कूलों ने जमा नहीं कराया परीक्षा शुल्क

 
Karoli 330 निजी स्कूलों ने जमा नहीं कराया परीक्षा शुल्क
करौली  न्यूज़ डेस्क, जिले के 330 निजी विद्यालयों की ओर से अभी तक प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन (कक्षा-5) का परीक्षा शुल्क डाइट कार्यालय में जमा नहीं कराया गया है।सूत्रों के अनुसार जिले के 330 निजी विद्यालय ऐसे हैं जिनके संचालकों ने सभी विद्यार्थियों की सत्र 2023-24 की करीब साढ़े 3 लाख रुपए परीक्षा शुल्क राशि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में जमा नहीं कराई है।ऐसे में प्रमाण पत्र सह ग्रेड तालिका के लिए कई परीक्षार्थी और उनके अभिभावकों को स्कूलों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। टोडाभीम ब्लॉक में 105 निजी विद्यालयों में से मात्र 1 निजी विद्यालय की ओर से ही शुल्क राशि जमा कराई गई। कई स्कूल संचालकों पर कई विद्यार्थियों का सत्र 2022 का भी परीक्षा शुल्क अब तक बकाया है। गौरतलब है कि परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग निदेशक की ओर से आवेदन तथा परीक्षा व्यवस्था शुल्क के संबंध में गैर राजकीय विद्यालयों से प्रति परीक्षार्थी 50 रुपए की दर से राशि लिया जाना निर्धारित है।

यह राशि परीक्षार्थी से नहीं ली जाएगी। आवेदन तथा परीक्षा व्यवस्था शुल्क के लिए निजी स्कूल संचालक परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से पीईईओ को बैंक ड्राफ्ट भेजते हैं, जहां से यह ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचता है। यहां से डाइट कार्यालय में प्राप्त होने पर इसी प्रक्रिया के माध्यम से प्रमाण पत्र सह ग्रेड तालिका का वितरण संबंधित स्कूलों को किया जाता है।

कई अभिभावकों ने बताया कि स्कूल संचालकों की ओर से डाइट कार्यालय से प्रमाण पत्र नहीं आने की कहकर काफी समय से टरकाया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार सत्र 2023-24 के कक्षा 5 के प्रमाण पत्र सह ग्रेड तालिका मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से जिले में वितरित किए जा चुके हैं। कई निजी स्कूल संचालकों की ओर से अब तक सभी विद्यार्थियों के आवेदन व परीक्षा शुल्क के संबंध में बैंक ड्राफ्ट जमा नहीं कराया है। सूत्रों के अनुसार स्कूल संचालक कुछ अभिभावकों को प्रमाण पत्र विद्यालय को प्राप्त नहीं होने की बात कहकर टरकाते रहते हैं। कई बार की दौड़भाग के बाद स्कूल संचालकों की ओर से प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों की ओर से कुछ रुपए बचाने के फेर में विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशान होना पड़ता है।