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करौली के संस्कृत शिक्षक शांतनु पाराशर को राज्य स्तरीय सम्मान, 22 श्रेष्ठ शिक्षकों में शामिल

 
करौली के संस्कृत शिक्षक शांतनु पाराशर को राज्य स्तरीय सम्मान, 22 श्रेष्ठ शिक्षकों में शामिल

शिक्षा जगत में करौली जिले का नाम एक बार फिर गौरवान्वित हुआ है। जिले के जाने-माने संस्कृत शिक्षक शांतनु पाराशर को राज्य स्तरीय श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान से नवाज़ा गया है। राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इस वर्ष राज्य भर से चुने गए 22 श्रेष्ठ शिक्षकों में शांतनु पाराशर भी शामिल रहे।

संस्कृत शिक्षा में दिया विशेष योगदान

शांतनु पाराशर पिछले कई वर्षों से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में निरंतर योगदान दे रहे हैं। उनकी पहचान न सिर्फ एक शिक्षक के रूप में है बल्कि संस्कृत को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने वाले शिक्षाविद् के तौर पर भी होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत पढ़ाने के लिए कई नवीन शिक्षण पद्धतियां विकसित की हैं, जिससे छात्रों की रुचि इस प्राचीन भाषा की ओर बढ़ी है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों में खुशी

शांतनु पाराशर के सम्मान की खबर से उनके विद्यार्थियों और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्कूल में बच्चों ने अपने शिक्षक को सम्मान मिलने पर तालियां बजाकर स्वागत किया। अभिभावकों का कहना है कि पाराशर ने बच्चों में संस्कृत के प्रति प्रेम और गर्व की भावना जगाई है।

सम्मान समारोह में भव्य आयोजन

राजधानी जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया। इस दौरान शांतनु पाराशर को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। समारोह में शिक्षकों की उपलब्धियों को मंच से सराहा गया और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की गई।

करौली के लिए गौरव का क्षण

शांतनु पाराशर को मिला यह सम्मान न केवल उनके लिए बल्कि पूरे करौली जिले के लिए गर्व का विषय है। जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी उन्हें बधाई दी। अधिकारियों का कहना है कि उनकी उपलब्धि अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का काम करेगी।

शिक्षा जगत में नई प्रेरणा

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सम्मान से शिक्षा जगत में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार होता है। यह सम्मान उन शिक्षकों के लिए है जो परंपरागत ढर्रे से हटकर बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए नए प्रयोग करते हैं। शांतनु पाराशर का नाम इस सूची में शामिल होना यह दर्शाता है कि संस्कृत जैसी भाषा को भी आधुनिक शिक्षा पद्धति के साथ जोड़ा जा सकता है।