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करौली के रियासतकालीन परकोटे को मिलेगा नया जीवन, पांचना बांध के साथ पर्यटन हब के रूप में होगा विकास

 
करौली के रियासतकालीन परकोटे को मिलेगा नया जीवन, पांचना बांध के साथ पर्यटन हब के रूप में होगा विकास

करौली शहर के रियासतकालीन ऐतिहासिक प्राचीर के अब अच्छे दिन आने की उम्मीद जगी है। साथ ही लंबे इंतजार के बाद शहर में परिक्रमा मार्ग का भी निर्माण होगा। जिले के सबसे बड़े पांचना बांध को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पांचना बांध व शहर के प्रमुख स्थलों पर सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाएंगे। इन सभी कार्यों से ऐतिहासिक प्राचीर का संरक्षण हो सकेगा। वहीं सौंदर्यीकरण होने से शहर सहित दूर-दराज से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भी अच्छा अनुभव हो सकेगा। दरअसल, राज्य सरकार ने एक सूची जारी की है।

इसमें राज्य के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए कार्यकारी एजेंसी का निर्धारण किया गया है। इसके तहत सरकार ने करौली शहर में प्राचीर के जीर्णोद्धार, परिक्रमा मार्ग के निर्माण, प्रमुख स्थलों के सौंदर्यीकरण कार्यों व पांचना बांध के सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृति जारी कर कार्यकारी एजेंसियों का निर्धारण कर दिया है। ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इन कार्यों के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी होने के बाद काम शुरू हो सकेंगे। उल्लेखनीय है कि पत्रिका ने कई बार जर्जर हो रहे परकोटे के बारे में समाचार प्रकाशित कर सरकार व प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।

जल्द तैयार होगा प्राक्कलन
पांचना बांध के सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग ने जल संसाधन विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया है, जबकि पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को शहर परकोटे के जीर्णोद्धार, परिक्रमा मार्ग निर्माण व सौंदर्यीकरण के कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्रों के अनुसार अब जल्द ही इन कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का प्राक्कलन तैयार किया जाएगा।

चमकेगा पांचना बांध
जिले के सबसे बड़े पांचना बांध को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पांचना पर्यटन विकास समिति की ओर से अभियान चलाया गया था। समिति के अध्यक्ष नरेंद्र बैंसला व अन्य पदाधिकारी विधायक, जिला प्रशासन, राज्य सरकार से पांचना बांध को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे थे। अब सरकार ने पांचना बांध को भी सूची में शामिल कर लिया है।

ढहती प्राचीर को मिलेगा सहारा

रियासत काल में करौली शहर में एक अनूठी प्राचीर का निर्माण कराया गया था, लेकिन अब यह मजबूत प्राचीर रखरखाव के अभाव में कई स्थानों पर ढह रही है। उस समय इस लंबी प्राचीर में 6 प्रवेश द्वार और 12 खिड़कियां भी बनाई गई थीं। हालांकि, अब खिड़कियों का स्वरूप बदल चुका है, जबकि प्रवेश द्वार और प्राचीर के जीर्णोद्धार की लंबे समय से जरूरत थी। कुछ साल पहले सरकार ने प्राचीर की मरम्मत पर पैसा भी खर्च किया था, जो अपर्याप्त था। प्राचीर पर कई स्थानों पर अतिक्रमण हो गया है, जबकि कई स्थानों पर प्राचीर ढह गई है। अब सरकार द्वारा जीर्णोद्धार कार्य में इसे शामिल करने से इसके अच्छे दिन आने की उम्मीद जगी है।

परिक्रमा मार्ग का होगा निर्माण

शहर में भगवान मदन मोहनजी का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां नियमित रूप से हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं। वहीं, विशेष अवसरों पर भगवान मदन मोहनजी की तीन कोसी नगर परिक्रमा का भी आयोजन किया जाता है, लेकिन परिक्रमा मार्ग का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है। शहरवासी लगातार इसकी मांग करते आ रहे हैं। अब परिक्रमा मार्ग के निर्माण की उम्मीद से लोगों में खुशी है। सरकार की बजट घोषणा के अनुसार प्रदेश के 20 कार्यों में पर्यटन विभाग ने करौली के परकोटे का जीर्णोद्धार, परिक्रमा मार्ग का निर्माण, शहर के मुख्य चौराहों का सौंदर्यीकरण, पांचना बांध का सौंदर्यीकरण को पर्यटन विकास कार्यों के रूप में शामिल कर कार्यकारी एजेंसी का निर्धारण कर दिया है। सरकार से कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही जिला कलक्टर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में कार्यों का निर्धारण कर एस्टीमेट तैयार किए जाएंगे।