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करौली: ग्राम पंचायत मुख्यालय बदलने के निर्णय के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया

 
करौली: ग्राम पंचायत मुख्यालय बदलने के निर्णय के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया

जिले की नवगठित ग्राम पंचायत आडी हूडपुरा के मुख्यालय को राज्य सरकार द्वारा बदलकर गुर्जा करने के निर्णय के विरोध में आडी हूडपुरा और पीपलपुरा के ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को वापस लेने और पंचायत मुख्यालय को मूल स्थान पर बनाए रखने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि आडी हूडपुरा पहले से ही पंचायत का मुख्यालय है और वहां सभी आधारभूत सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अचानक यह निर्णय स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दबाव में लिया गया है, जो पंचायत के सामान्य कामकाज और विकास को प्रभावित करेगा। प्रदर्शन में सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया और उन्होंने नारेबाजी करते हुए अपना रोष व्यक्त किया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मुख्यालय बदलने से गाँव के लोगों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो वे आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाएंगे।

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की। कलेक्टर ने बताया कि राज्य सरकार को ग्रामीणों की शिकायत से अवगत कराया गया है और जल्द ही इस मामले पर समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि पंचायत विकास और जनता की सुविधा सर्वोपरि है और इसे ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पंचायत मुख्यालय बदलने जैसे निर्णयों से ग्रामीणों में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में प्रशासन और सरकार को स्थानीय लोगों की राय और विकास को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विभिन्न पोस्टर और बैनर भी उठाए, जिन पर लिखा था – “हमारा मुख्यालय हमारी पहचान है” और “पंचायत का अधिकार हमारे हाथ में रहना चाहिए।” उन्होंने कहा कि गुर्जा गाँव को मुख्यालय बनाना उनके अधिकारों और हितों के खिलाफ है।

इस घटना ने करौली जिले में पंचायत स्तर पर स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को ऐसे निर्णयों में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

ग्रामीण इस आंदोलन को शांति पूर्ण तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगें स्पष्ट हैं – पंचायत मुख्यालय को मूल स्थान पर बनाए रखा जाए और उनके अधिकारों का हनन न हो। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की समीक्षा के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।