Karoli रोडवेज डिपो में बसों की बढ़ती संख्या, संसाधनों की कमी
करौली न्यूज़ डेस्क, जिले की हिण्डौन और करौली डिपो में बस बेड़ा बढ़ने के बाद मरमत और डेली मेंटीनेंस के लिए मैकेनिकों की कमी खलने लगी है। दोनों डिपो की हिण्डौन स्थित संयुक्त कार्यशाला में उच्च तकनीक युुक्त बसों में खराबी की जांच के लिए न तो लेपटॉप आया और न ही विभिन्न श्रेणियों में मैकेनिक लगाए गए हैं। कार्यशाला में महज 24 कार्मिक ही कार्यरत हैं,जबकि डिपो का बस बेड़ा 70 के पार है। ऐसे में बसों की स्टेण्डर्ड के अनुसार जांच नहीं हो पा रही है।रोडवेज डिपो सूत्रों के अनुसार रोडवेज मुयालय से करौली डिपो के लिए 20 व हिण्डौन डिपो कार्यशाला में विभिन्न श्रेणियों में 100 यांत्रिक कर्मियों के पद स्वीकृत किए गए है। लेकिन करौली डिपो में मात्र 2 मैकेनिक व हिण्डौन में 24 कार्मिक कार्यरत हैं। जो हिण्डौन डिपो में दिन व रात की अलग-अलग पारियों में बसों की मरमत व जांच करते हैं।
बीते महीनों रोडवेज मुयालय से 15 नई बस आने व अन्य आगारों से 9 बस हस्तांतरित होने से जिले की रोडवेज डिपो में बस संया बढ़कर 74 हो गई है। ऐसे में कार्यशाला में दो पारियों में विभक्त 26 मैकेनिक कम साबित हो रहे हैं। जबकि डिपो कार्यशाला में दिन व रात्रि पारी में 45-50 बस रवानगी से पहले दैनिक जांच के लिए आती हैं।इनमें करीब 41 बसें बीएस-5 व बीएस-6 श्रेणी की है। जिनकी जांच के लिए संबंधित तकनीक के सॉटवेयर से युक्त लेपटॉप की जरूरत होती है।
कार्यशाला में 94 पद रिक्त, सर्वाधिक 31 आर्टिजन तृतीय
रोडवेज डिपो की कार्यशाला में विभिन्न श्रेणियों के मैकेनिकों के 94 पद रिक्त हैं। इनमें आर्टिजन तृतीय श्रेणी के सर्वाधिक 31 पद रिक्त हैं। वहीं यांत्रिक कार्मिक द्वितीय श्रेणी में 28 पदों की तुलना में 11 ही कार्यरत हैं। वही प्रथम श्रेणी मैकेनिक की 18 पदों की तुलना में 5 कार्यरत है और 13 स्थान रिक्त हैं। ऐसे में रवानगी से पहले मानकों के तहत पूरी जांच नहीं होने से बसें रास्ते में ब्रेकडाउन हो जाती है।रोडवेज डिपो के 74 बस के बेेडा में 41 बस सेंसर तकनीक से ऑपरेट होती हैं। इसकी जांच व खराबी तलाशने के लिए बस कपनी के सॉटवेयर युक्त लेपटॉप की जरुरत होती है। डिपो में हाल ही में आई 15 बीएस- 6 की बस कपनी गारंटी में हैं। जबकि 2020 माडल की 26 से अवधि पार हैं। ऐसे में इन बसों की डिपो के खर्चे पर या रोडवेज की सेंट्रल वर्कशॉप में मरमत कराई जाती है।
