बिना रजिस्ट्रेशन चला रहे हैं लैब तो हो जाएं सावधान! स्वास्थ्य विभाग का अल्टीमेटम, कभी भी गिर सकती है गाज
करौली जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रही मेडिकल लैब के खिलाफ अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिले की सभी डायग्नोस्टिक लैब निर्धारित नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं करवाती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई राजस्थान सरकार द्वारा लागू राजस्थान क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) नियम 2013 तथा केन्द्र सरकार के क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट नियम 2018 के तहत की जाएगी।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. जयंतीलाल मीना ने बताया कि ये नियम अब पूरे प्रदेश में प्रभावी हैं तथा सभी डायग्नोस्टिक सेंटरों के लिए इनकी पालना करना अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले में संचालित सभी मेडिकल लैब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करें तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता से बचा जा सके।
डॉ. मीना ने बताया कि सभी डायग्नोस्टिक लैब को स्थाई रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। इसके लिए विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म को डाउनलोड कर उसे भरकर संबंधित दस्तावेजों के साथ सीएमएचओ कार्यालय में जमा करवाना होगा। आवेदन करते समय संचालक को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी जानकारी नियमों के अनुसार और सही प्रारूप में दी गई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सभी लैब संचालकों से अपेक्षा करता है कि वे बिना किसी देरी के पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें। अगर कोई लैब नियमों का उल्लंघन करती पाई गई तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा और स्थिति गंभीर होने पर लैब को सील भी किया जा सकता है।
पंजीकरण प्रक्रिया इस प्रकार है:
सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर जाएं।
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट पंजीकरण फॉर्म डाउनलोड करें।
फॉर्म को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ भरें।
पूरा आवेदन पत्र संबंधित दस्तावेजों के साथ सीएमएचओ कार्यालय में जमा करें।
स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट संदेश है- अनुशासन में रहकर ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं दी जा सकती हैं और इसके लिए नियमानुसार पंजीकरण पहली शर्त है।
