Karoli बाजरे के नुकसान से परेशान किसान कर रहे हैं सरकारी समर्थन मूल्य का इंतजार
करौली न्यूज़ डेस्क, करौली मोटा अनाज बाजरे को श्रीअन्न का दर्जा देकर विदेशों तक यात कर दिया है, लेकिन अतिवृष्टि से बाजरे में खराबे से परेशान किसान फसल के दाम में सरकारी सबल की बाट जोह रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से एमएसपी दर तय करने के बावजूद बाजरा की समर्थन मूल्य खरीद शुरू नहीं की है। हालांकि मौसम के प्रतिकूल होने से बाजरा का उत्पादन कम हुआ है। फसल आवक शुरू होने के एक पखाबाड़े में जिले की हिण्डौन कृषि उपज में एक लाख क्विंटल से अधिक बाजरा की आवक हो चुकी है। जिसे किसानों को खुली नीलामी में बेचना पड़ रहा है। दरअसल बाजरा उत्पादन में राजस्थान के देश में अव्वल होने से इस वर्ष राज्य सरकार ने अन्य जिंसों की भांति एमएसपी खरीद मूल्य घोषित किया था। सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बाजरे का समर्थन मूल्य 2,625 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है।
बुवाई से लेकर कटाई तक बारिश होने से पहले किसानों को खराबे से काफी नुकसान झेलना पड़ा है। ऐसे में एमएसपी दर घोषित होने से किसानों को सरकार द्वारा खरीद किए जाने से संबल मिलने की उमीद लगी थी। लेकिन अभी तक जिले में खरीद को लेकर सुगबुगाहट नहीं है। गौरतलब है कि कृषि उपज मंडी में करीब 20 सितबर से नई फसल के बाजरा की मंडी में आवक शुरू हो गई। शनिवार को मंडी में करीब 18 हजार व सोमवार को 15 हजार कट्टा बाजरा की आवक हुई रही। अब तक मंडी समिति की हिण्डौन व टोडाभीम मंडी में बाजरा की आवक का आंकड़ा 1 लाख 20 हजार 594 क्विंटल तक पहुंच गया है। इस दौरान मंडी में बाजरा के भाव 2370 रुपए से 2450 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
जिले में तीन फसलों की होती खरीद
राज्य सरकार की ओर से हर फसली सीजन में जिंसों की एमएसपी दर तय की जाती है। संबंधित जिलों में फसलों के अनुरूप खरीद शुरू की जाती है। हिण्डौन क्रय-विक्रय सहकारी समिति के कैशियर सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि जिले में आमतौर सरसों, गेहूं व चना की एमएसपी पर खरीद होती है।
