करौली न्यूज़ डेस्क, करौली राइजिंग राजस्थान में निवेशक प्रदेश के औद्योगिक विकास को नए परवाज दे रहे हैं, वहीं करौली जिले के उद्यमियों को 12 वर्ष बाद भी रीको की पिछड़ा जिला प्रोत्साहन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकारी योजनाओं का संबल नहीं मिलने से जिले में उद्योगों की चाल मंद पड़ गई हैं। स्थिति यह कि रीको औद्योगिक क्षेत्र में करीब 20 प्रतिशत यूनिटें प्रॉडक्शन में आने के बाद बंद हो गई हैं। जो फिर से खड़ी नहीं हो सकी है।दरअसल, राज्य सरकार ने प्रदेश में समन्वित औद्योगिक विकास के लिए वर्ष 2012 में औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों के लिए पिछड़ा जिला औद्योगिक विकास योजना शुरू की थी। योजना में करौली जिला सहित धौलपुर, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर व बारां को शामिल किया था। जिससे उद्यमियों को राहत से संबल देने के लिए रीको के सर्विस चार्ज में 50 फीसदी छूट देने के साथ अन्य सुविधाएं व रियायतें देने का प्रावधान किया गया था। सवाई माधोपुर यूनिट के गंगापुर सिटी सहित अन्य जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को योजना का लाभ मिल रहा है। लेकिन करौली जिले के उद्यमियों को रीको की राहत योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह कि मेक इन इंडिया और स्टार्टअप के दौर में रीको औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग को अब तक प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।
एक वर्ष से आरएम का पद रिक्त : रीको की सवाई माधोपुर यूनिट में हिण्डौन बड़े औद्योगिक क्षेत्र में शुमार है, लेकिन यहां पर एक वर्ष से क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) का पद रिक्त है। अक्टूबर 2023 में महेशचंद मीणा का स्थानांतरण होने के बाद किसी का पदस्थापन नहीं किया गया। व्यवस्था के लिए टोंक औद्योगिक क्षेत्र के आरएम सीताराम मीणा को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा हुआ है।
दर्जा पिछड़ा का, शुल्क अगड़ों के समान: औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी एम. इकबाल ने बताया कि रीको ने करौली जिले को पिछड़ा क्षेत्र का दर्जा दिया हुआ। लेकिन उद्यमियों से पूर्ण विकसित क्षेत्र के मानिद सर्विस शुल्क वसूला जाता है।मोम्मद इकबाल ने बताया कि सर्विस शुल्क की हिण्डौन में 10 रुपए 70 पैसे वर्ग मीटर की दर है, जबकि गंगापुरसिटी में इससे आधा 5 रुपए 50 पैसा वर्ग मीटर है। इससे उद्यमियों छूट होने बाद भी अधिक शुल्क चुकाना पड़ रहा है।