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पर्युषण महापर्व पर पल्लीवाल मंदिर में भक्तिमय माहौल, भगवान महावीर का अभिषेक और संवत्सरी का आयोजन

 
पर्युषण महापर्व पर पल्लीवाल मंदिर में भक्तिमय माहौल, भगवान महावीर का अभिषेक और संवत्सरी का आयोजन

पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर पल्लीवाल मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट मोहन नगर में बुधवार को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से भर गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखी गई और लोगों ने धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेकर आस्था और भक्ति का अनुभव किया।

मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों ने बताया कि पर्युषण महापर्व जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसे शांतिपूर्ण चिंतन, आत्मशुद्धि और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से मनाया जाता है। इस महापर्व के दौरान मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक, संवत्सरी और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।

बुधवार को मंदिर में भगवान महावीर के अभिषेक का विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मिलकर भगवान महावीर की मूर्ति पर जल, पंचामृत और फूलों से अभिषेक किया। इसके साथ ही संवत्सरी का आयोजन भी किया गया, जिसमें भक्तों ने अपने परिवार और समाज के कल्याण की कामना करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

स्थानीय श्रद्धालुओं ने कहा कि इस आयोजन में भाग लेकर उन्हें आध्यात्मिक संतोष और मानसिक शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्म-विश्लेषण, क्षमाशीलता और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देता है।

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने बताया कि इस महापर्व के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में व्यवस्थित स्थान, जलपान की व्यवस्था और साफ-सफाई पर ध्यान दिया गया। इसके अलावा, धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन में स्वयंसेवकों की अहम भूमिका रही।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सद्भाव, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्युषण महापर्व जैसे अवसर लोगों को अपने भीतर आत्मशुद्धि करने और समाज में शांति और सहयोग का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित करते हैं।

इस प्रकार, पर्युषण महापर्व के अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर पल्लीवाल मंदिर में भगवान महावीर के अभिषेक और संवत्सरी के आयोजन ने मंदिर परिसर को भक्तिमय माहौल से भर दिया। श्रद्धालुओं की भागीदारी और धार्मिक उत्साह ने इस पर्व को और भी खास बना दिया।