घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल पर दाम बढ़ने के बाद आम जनता परेशान, सांसद Hanuman Beniwal ने PM Modi से की ये डिमांड
केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी कर दी है। प्रति गैस सिलेंडर 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इस संबंध में जानकारी देते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। नई कीमत मंगलवार 8 अप्रैल से लागू भी हो गई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। एक्साइज ड्यूटी में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।
हनुमान बेनीवाल ने की ये मांग
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि घरेलू गैस सिलेंडर और उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर के दाम में 50 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर केंद्र सरकार ने एक बार फिर देश की जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया है, पहले से ही महंगाई से परेशान लोगों की जेब पर बोझ बढ़ाकर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि उन्हें जनता की बुनियादी समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है, ये जनविरोधी कदम है। हनुमान बेनीवाल ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूं कि जनहित में एलपीजी सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल प्रभाव से वापस लें और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
एलपीजी सिलेंडर की नई कीमत?
आपको बता दें कि अब उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत मिलने वाला सिलेंडर 503 रुपये से बढ़कर 553 रुपये में मिलेगा। वहीं, आम उपभोक्ताओं को अब एक सिलेंडर के लिए 853 रुपये चुकाने होंगे, जो पहले 803 रुपये था। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह बढ़ोतरी सब्सिडी पाने वाले और गैर सब्सिडी वाले दोनों उपभोक्ताओं पर लागू होगी। आपको बता दें कि देश में इस समय करीब 32.94 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें से 10.33 करोड़ उज्ज्वला योजना के लाभार्थी हैं।
डीजल-पेट्रोल के दाम भी बढ़े
गौरतलब है कि देशभर में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद डीजल और पेट्रोल के दाम भी बढ़ गए हैं। केंद्र सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। इसमें 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है, उसका भुगतान तेल कंपनियों को अपनी कमाई से करना होगा। यानी इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।
