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Karoli पंचकल्याणक महोत्सव पर 11 दिन के उत्सव व उल्लास का आज से आरम्भ, घटयात्रा होगी

 

करौली न्यूज़ डेस्क, करौली श्री महावीरजी में महामस्तकाभिषेक व पंचकल्याणक महोत्सव को लेकर बुधवार देर रात तक तैयारियां चलती रहीं। महावीर स्वामी की 24 फीट ऊंची खड्गासन पत्थर की मूर्ति सहित 24 तीर्थंकरों की 24 मूर्तियों का अभिषेक उत्सव गुरुवार से शुरू होगा। समारोह राज्य अतिथि आचार्य वर्धमान सागर की उपस्थिति में होगा। कटला परिसर से घाटयात्रा निकाली जाएगी। मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ध्वजारोहण कर महोत्सव की शुरुआत करेंगे। सीएम गहलोत जयपुर से सुबह 9 बजे रवाना होकर 9.30 बजे श्रीमहावीरजी पहुंचेंगे. 11 बजे श्रीमहावीरजी से गंगापुर के लिए प्रस्थान करेंगे। यह फेस्टिवल 24 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा। इसमें जयपुर सहित देश भर से लाखों श्रद्धालु भाग लेंगे। भगवान महावीर महामस्तकाभिषेक महोत्सव समिति के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल व महासचिव महेंद्र कुमार पाटनी ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 24 से 28 नवंबर तक चलेगा. भगवान महावीर की 24 फीट ऊंची खड्गासन प्रतिमा के साथ ही परिकर युक्त चौबीसी व कमल मंदिर के नवग्रह अरिष्ट निवारक जिनालय प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा होगी। प्रतिष्ठााचार्य पंडित हसमुख जैन धरियावाद, पंडित मुकेश जैन मधुर के निर्देशन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। कार्यक्रम को लेकर कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, एसपी नारायण तोगस, एएसपी सुरेश जैफ, सीओ हिंडौन सहित 5 थानों के पुलिस अधिकारियों ने व्यवस्था देखी. कार्यक्रम को देखते हुए 600 पुलिसकर्मियों की फोर्स तैनात की गई है। मुख्यमंत्री कॉफी टेबल बुक और महामस्तकाभिषेक स्मारिका का विमोचन भी करेंगे। प्रवीण चंद्र छाबड़ा द्वारा लिखित पुस्तक चंदन के बाबा का नवीनतम अंक भी जारी किया जाएगा। समारोह में उद्योग एवं देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत समेत कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और समाजसेवी शामिल होंगे.12.30 बजे सकलीकरण, इन्द्र प्रतिष्ठा, श्री जिनाभिषेक, यज्ञ मंडल विधान पूजा, गर्भ कल्याणक एवं अंतरांग क्रिया, 3.30 बजे गर्भावतार, गर्भ कल्याणक पूजा माता का आगमन, गोद भराई महोत्सव, राजभवन में महाराजा सिद्धार्थ अपराह्न आगमन, उद्घाटन, राज्यसभा व शाम 6.30 बजे महाआरती व रात 8 बजे गर्भ कल्याणक नाटक का मंचन होगा.

कर्नाटक के श्रवण बेलागोला में भगवान बाहुबली की प्रतिमा का हर 12 साल में महामस्तकाभिषेक किया जाता है और अब यहां भगवान महावीर का महामस्तकाभिषेक किया जा रहा है। पाषाण या अष्ट धातु की मूर्ति को विधि-विधान से प्रतिष्ठित करने और भगवान की पूजा करने के पर्व को पंचकल्याणक कहते हैं। इसमें भगवान के गर्भकल्याणक, जन्मकल्याणक, तपकल्याणक, ज्ञानकल्याणक और मोक्ष अवस्थाओं के बाद पत्थर की मूर्ति भगवान बन जाती है। श्रीमहावीरजी में पंचकल्याणक के साथ ही मिट्टी से निकली भगवान महावीर की मूर्ति का 24 साल बाद अभिषेक किया जा रहा है। मूर्तियों के सिर पर अभिषेक करने की कोई निश्चित समय अवधि नहीं है। मूर्तियों का मस्तकाभिषेक मंदिरों की समितियों की सुविधा के अनुसार तय किया जाता है। महामस्तकाभिषेक मूर्ति की स्वच्छता के लिए नहीं बल्कि अपने कर्मों की शुद्धता के लिए किया जाता है। ऐसा करने से भक्त अच्छे कर्म करते हैं और अपने पापों का पश्चाताप करते हैं। प्रत्येक भक्त मस्तकाभिषेक कर सकता है, लेकिन मूर्ति की सुरक्षा की दृष्टि से समिति द्वारा लिया गया निर्णय अलग बात है। अभी तक महामस्तकाभिषेक विशेष मूर्तियों के लिए ही किया जाता है। भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा, आचार्य, ब्रह्मचर्य, अहिंसा के संदेश को अपनाकर मनुष्य अपने जीवन को अर्थ दे सकता है। जैसा भास्कर के उमेश शर्मा को बताया।