मोबाइल टावर डिस्मेंटल करने के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी: जोधपुर में ट्रांसपोर्टर ने जियो वेयरहाउस में जमा नहीं करवाए उपकरण, फर्जी दस्तावेज बनाए
जोधपुर शहर के विवेक विहार थाना क्षेत्र में मोबाइल टावर डिस्मेंटल करने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एसआर रोडलाइंस के एक ट्रांसपोर्टर ने मोबाइल टावर से जुड़े उपकरण जियो कंपनी के वेयरहाउस में जमा करवाने के बजाय फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर दिए। इस तरह कंपनी और संबंधित फर्म के साथ धोखाधड़ी की गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क कंपनियां पुराने या अनुपयोगी मोबाइल टावरों को हटाने और उनके उपकरणों को निर्धारित वेयरहाउस तक पहुंचाने का काम अलग-अलग फर्मों और ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से करवाती हैं। इस प्रक्रिया में टावर से उतारे गए उपकरणों को सुरक्षित तरीके से निर्धारित स्थान पर जमा करवाना होता है। इसके बाद कंपनी के रिकॉर्ड में उनकी एंट्री की जाती है।
वेयरहाउस में उपकरण जमा कराने की थी जिम्मेदारी
मामले में एसआर रोडलाइंस के ट्रांसपोर्टर को मोबाइल टावर डिस्मेंटल करने के बाद उससे संबंधित सामान जियो कंपनी के वेयरहाउस तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि ट्रांसपोर्टर ने इस जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। टावर से निकाले गए उपकरणों को वेयरहाउस में जमा करवाने के बजाय उनके संबंध में फर्जी दस्तावेज तैयार कर दिए गए।
आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के जरिए ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि कंपनी के निर्धारित सिस्टम के अनुसार सामान जमा करवाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इससे कंपनी और संबंधित फर्म को आर्थिक नुकसान पहुंचा।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई धोखाधड़ी
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ट्रांसपोर्टर ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर कंपनी को गुमराह किया। मोबाइल टावर के उपकरणों की वास्तविक स्थिति और उनके जमा होने से संबंधित रिकॉर्ड में अंतर सामने आने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
इसके बाद संबंधित पक्ष की ओर से पुलिस में शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर विवेक विहार थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कितने मोबाइल टावरों का सामान वेयरहाउस में जमा नहीं करवाया गया और इस पूरे मामले में कितनी आर्थिक गड़बड़ी हुई है।
पुलिस खंगाल रही दस्तावेज और लेन-देन का रिकॉर्ड
जांच के दौरान पुलिस संबंधित फर्म, ट्रांसपोर्टर और कंपनी के बीच हुए कामकाज से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर सकती है। इसके साथ ही टावर डिस्मेंटल करने, उपकरणों के परिवहन और वेयरहाउस में सामान जमा होने से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में धोखाधड़ी की कुल राशि और उपकरणों की संख्या स्पष्ट नहीं है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े नुकसान और अन्य लोगों की भूमिका का खुलासा हो सकेगा।
