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रातानाडा गणेश मंदिर क्षेत्र की सरकारी भूमि अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन को दी कड़ी चेतावनी

 
रातानाडा गणेश मंदिर क्षेत्र की सरकारी भूमि अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन को दी कड़ी चेतावनी

राजस्थान के Jodhpur में बेशकीमती सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई है। यह मामला शहर के रातानाडा स्थित गणेश मंदिर के पास की जमीन से जुड़ा है, जहां लंबे समय से अतिक्रमण को लेकर विवाद चल रहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान Rajasthan High Court की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह शामिल थे, ने प्रशासन द्वारा पहले दिए गए निर्देशों की अनुपालना नहीं होने पर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि बार-बार आदेश देने के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

कोर्ट ने विशेष रूप से ड्रोन सर्वे से जुड़े पुराने निर्देशों की अनुपालना न होने पर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और सरकारी भूमि की वास्तविक सीमा तय करने के लिए ड्रोन सर्वे अत्यंत आवश्यक था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

यह भूमि Ratanada क्षेत्र के गणेश मंदिर के आसपास स्थित है, जिसे बेशकीमती सरकारी संपत्ति माना जा रहा है। इस क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण न केवल भूमि उपयोग प्रभावित हो रहा है, बल्कि शहरी विकास योजनाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन की सुस्ती पर गहरी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 18 मई तक पूर्व में दिए गए निर्देशों की पालना नहीं की गई, तो जोधपुर कलेक्टर और Jodhpur Development Authority (जेडीए) के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और अवैध अतिक्रमण हटाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। खंडपीठ ने यह संकेत दिया कि यदि समय सीमा के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सख्त न्यायिक कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण की पहचान और सीमांकन के लिए ड्रोन सर्वे की प्रक्रिया प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से यह कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। अब अदालत के सख्त रुख के बाद प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला काफी समय से चर्चा में है, और क्षेत्र के लोगों में भी सरकारी भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर चिंता बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में शहरी विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

फिलहाल अदालत के निर्देश के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है और संबंधित विभागों को तत्काल रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों का कितना पालन किया है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।