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जोधपुर में राजनाथ सिंह ने दी चेतावनी, बोले- समुद्री रास्तों का हथियार के रूप में हो रहा इस्तेमाल; आसमान में एक साथ उड़े खतरनाक फाइटर जेट

 
जोधपुर में राजनाथ सिंह ने दी चेतावनी, बोले- समुद्री रास्तों का हथियार के रूप में हो रहा इस्तेमाल; आसमान में एक साथ उड़े खतरनाक फाइटर जेट

राजस्थान के जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने चेताया कि समुद्री रास्तों का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा रहा है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इस बीच जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर दुनिया के कई आधुनिक लड़ाकू विमानों ने संयुक्त उड़ान और युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया।

जोधपुर में जुटीं कई देशों की वायु सेनाएं

जोधपुर में चल रहे तरंग शक्ति 2026 युद्धाभ्यास में भारतीय वायु सेना के साथ अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायु सेनाएं भाग ले रही हैं। इस अभ्यास का आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता विकसित करना और परिचालन अनुभव साझा करना है।

युद्धाभ्यास में एफ-35 लाइटनिंग-2, राफेल, एफ-16, ए400एम और केसी-30ए जैसे आधुनिक विमान शामिल हैं। अलग-अलग देशों के विमानों की संयुक्त गतिविधियों से पायलटों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और तकनीकी क्षमताओं को समझने का अवसर मिल रहा है।

समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की समुद्री सुरक्षा संबंधी चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री मार्गों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। दुनिया के कई प्रमुख व्यापारिक रास्ते ऊर्जा आपूर्ति, माल परिवहन और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं।

समुद्री मार्गों पर संघर्ष, हथियारों की तस्करी और सुरक्षा संबंधी खतरे कई देशों के लिए चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में समुद्री क्षेत्रों की निगरानी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।

आधुनिक फाइटर जेट्स ने दिखाई ताकत

तरंग शक्ति अभ्यास में आधुनिक लड़ाकू विमानों की भागीदारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। भारतीय वायु सेना के विमानों के साथ विदेशी लड़ाकू विमानों ने भी संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लिया। ऐसे अभ्यासों में मिशन प्लानिंग, संचार व्यवस्था और अलग-अलग विमानों के बीच समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

एफ-35 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जबकि राफेल और एफ-16 भी आधुनिक युद्धक क्षमताओं से लैस हैं। इन विमानों की संयुक्त भागीदारी से विभिन्न देशों की वायु सेनाओं को उन्नत हवाई अभियानों का अनुभव मिलता है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभ्यास?

भारत की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। देश के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री रास्तों से जुड़ा है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ हवाई रक्षा और मित्र देशों के साथ सैन्य सहयोग मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

तरंग शक्ति जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों से भारत को अन्य देशों की सैन्य कार्यप्रणाली समझने, संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाने और रक्षा संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिलता है।

इस तरह जोधपुर में आयोजित यह युद्धाभ्यास केवल आधुनिक लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का भी महत्वपूर्ण मंच है।