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OMR शीट की गलती पर राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मेधावी छात्र को मिली राहत

 
OMR शीट की गलती पर राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मेधावी छात्र को मिली राहत

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने प्रतियोगी परीक्षाओं में OMR शीट भरने के दौरान होने वाली मानवीय गलतियों को लेकर एक नजीर पेश करने वाला अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने JET (Joint Entrance Test) परीक्षा में फिजिक्स विषय की जगह गलती से एग्रीकल्चर विषय के गोले भर देने वाले एक मेधावी छात्र को बड़ी राहत देते हुए उसके बीएससी (B.Sc.) में प्रवेश का रास्ता साफ कर दिया है।

यह मामला उस छात्र से जुड़ा है, जिसने JET परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए थे, लेकिन OMR शीट भरते समय विषय चयन में हुई एक तकनीकी गलती के कारण उसे परिणाम में नुकसान उठाना पड़ा। छात्र ने फिजिक्स विषय की परीक्षा दी थी, लेकिन OMR शीट में गलती से एग्रीकल्चर विषय के गोले भर दिए गए। इस वजह से परीक्षा एजेंसी ने उसके परिणाम को अमान्य मानते हुए आगे की प्रक्रिया से बाहर कर दिया।

छात्र ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान छात्र की ओर से दलील दी गई कि उसने सही विषय की परीक्षा दी थी और गलती केवल OMR शीट भरने में हुई, जो कि अनजाने में हुई मानवीय त्रुटि है। इसके चलते उसके पूरे करियर पर संकट आ गया, जबकि उसकी मेरिट और योग्यता पर कोई सवाल नहीं है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों का भविष्य दांव पर लगा होता है और ऐसी परिस्थितियों में तकनीकी या क्लेरिकल गलती के आधार पर किसी मेधावी छात्र को पूरी तरह से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने माना कि OMR शीट भरने में हुई यह गलती जानबूझकर नहीं थी और छात्र की उत्तर पुस्तिका व अन्य रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि उसने फिजिक्स विषय की ही परीक्षा दी थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि परीक्षा एजेंसियों को ऐसी परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि छात्रों का भविष्य केवल एक छोटी सी चूक के कारण बर्बाद न हो। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्र को बीएससी पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जाए और उसकी योग्यता के आधार पर आगे की पढ़ाई में कोई बाधा न डाली जाए।

इस फैसले को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा, जहां छात्र अनजाने में OMR शीट भरने में गलती कर बैठते हैं।

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले में परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा और जानबूझकर की गई गलतियों को इस फैसले के दायरे में नहीं रखा जाएगा। कुल मिलाकर, राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला छात्रों के हित में और न्यायपूर्ण व्यवस्था को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।