Rajasthan High Court: खीचन विस्तार राजस्व गांव के गठन को हाईकोर्ट की मंजूरी, याचिका खारिज
राजस्थान हाईकोर्ट ने फलोदी जिले में नए राजस्व गांव खीचन विस्तार के गठन को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि राज्य सरकार ने नए राजस्व गांव के गठन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी की है। ऐसे में प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह निर्णय पूरी तरह कानून सम्मत है।
जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट में Sanjeet Purohit की एकलपीठ ने की। याचिकाकर्ता ने फलोदी जिले में खीचन विस्तार को नए राजस्व गांव के रूप में गठित किए जाने को चुनौती दी थी और सरकार के निर्णय को निरस्त करने की मांग की थी।
सरकार ने नियमों का किया पालन
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि राज्य सरकार ने राजस्व गांव के गठन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है। साथ ही आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताओं को भी पूरा किया गया था।
प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर लिया गया फैसला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नए राजस्व गांव का गठन प्रशासनिक सुविधा और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। ऐसे मामलों में सरकार को नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है और जब तक प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या मनमानी साबित न हो, न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
याचिका में नहीं मिला हस्तक्षेप का आधार
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता सरकार के निर्णय में किसी प्रकार की कानूनी खामी या नियमों के उल्लंघन को साबित नहीं कर पाया। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार के निर्णय को बरकरार रखा।
फैसले का प्रशासनिक महत्व
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फलोदी जिले में खीचन विस्तार राजस्व गांव के गठन को कानूनी मान्यता मिल गई है। इससे क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यों के संचालन, राजस्व प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों को सरकारी सेवाओं की उपलब्धता में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
