राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आरटीआई में आंसर बुक की कॉपी पर 1000 रुपए प्रोसेसिंग शुल्क अवैध
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS), जयपुर द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आंसर बुक की सर्टिफाइड कॉपी देने के लिए वसूले जा रहे 1000 रुपए के प्रोसेसिंग शुल्क को अवैध करार देते हुए इसे रद्द कर दिया है।
यह फैसला जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने वर्ष 2021 में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 मार्च को यह रिपोर्टेबल जजमेंट जारी किया।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि आरटीआई कानून के तहत किसी भी सूचना की प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए निर्धारित शुल्क सीमित होता है। ऐसे में आरयूएचएस द्वारा आंसर बुक की सर्टिफाइड कॉपी देने के नाम पर 1000 रुपए का अतिरिक्त प्रोसेसिंग शुल्क लेना नियमों के खिलाफ है।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि किसी विश्वविद्यालय या संस्था द्वारा अत्यधिक शुल्क लिया जाता है तो इससे आम लोगों, खासकर छात्रों के लिए सूचना प्राप्त करना कठिन हो सकता है।
कोर्ट ने माना कि आरटीआई के तहत सूचना देने के लिए निर्धारित नियमों के अलावा अतिरिक्त शुल्क वसूलना कानूनी रूप से उचित नहीं है। इसलिए आरयूएचएस द्वारा लिया जा रहा यह 1000 रुपए का प्रोसेसिंग शुल्क कानून के अनुरूप नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है।
इस फैसले के बाद अब आरयूएचएस छात्रों से आंसर बुक की सर्टिफाइड कॉपी देने के लिए इतना अधिक शुल्क नहीं ले सकेगा। अदालत के इस निर्णय को छात्रों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि पहले उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त करने के लिए भारी शुल्क देना पड़ता था।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे न केवल आरयूएचएस बल्कि अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आरटीआई के तहत सूचना देने के नियमों का सही तरीके से पालन करें।
राजस्थान हाईकोर्ट का यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए नजीर साबित हो सकता है और छात्रों को सूचना प्राप्त करने के अपने अधिकार का उपयोग करने में सहूलियत मिलेगी।
