राजस्थान हाईकोर्ट ने टीएसपी क्षेत्रों में नगर पालिकाओं के विस्तार को दिया हरी झंडी
राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर और बांसवाड़ा के टीएसपी (Tribal Sub-Plan/Scheduled Areas) क्षेत्रों में नगर पालिकाओं के गठन और विस्तार के तहत राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को सही ठहराया है। यह निर्णय जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सुनाया।
अधिसूचना के तहत कुछ गांवों को नगर पालिकाओं के विस्तार में शामिल किया गया था। इस पर विवाद उठाया गया था कि टीएसपी/अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों को नगर पालिका में शामिल करना उचित है या नहीं। राज्य सरकार का तर्क था कि यह कदम विकास, शहरी सुविधाओं और प्रशासनिक सुगमता के लिए आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना को कानूनी रूप से वैध मानते हुए स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल शहरी क्षेत्र के विकास और नागरिक सुविधाओं का विस्तार करना है, और इसमें स्थानीय जनजातीय आबादी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। न्यायाधीशों ने कहा कि टीएसपी क्षेत्रों में प्रशासनिक सुधार और नगर निकायों का विस्तार कानूनी दायरे में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासनिक विकास में अहम साबित होगा। इसके माध्यम से नगर पालिकाओं के विस्तार से बेहतर बुनियादी सुविधाएं, सड़क, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं प्रदान करना आसान होगा।
राज्य सरकार के अधिकारी ने कहा कि हाईकोर्ट के इस निर्णय से अब नगर पालिकाओं के विस्तार कार्यों को तेज़ी से लागू किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार टीएसपी क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की सहमति और हितों का ध्यान रखेगी।
इस प्रकार, राजस्थान हाईकोर्ट का यह निर्णय टीएसपी क्षेत्रों में शहरी प्रशासनिक सुधार और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे उदयपुर और बांसवाड़ा के नगर पालिका विस्तार कार्यक्रम को कानूनी समर्थन मिला है और भविष्य में अन्य टीएसपी क्षेत्रों में भी इसी मॉडल के तहत सुधार की संभावना बढ़ गई है।
